Friday, March 6, 2015

सभी साथियों को होली की हार्दिक शुभकामनाये.

आवाज समाचार सेवा की और से सभी पाठकों को होली की ढेरों शुभकामनाएं|
इस होली पर प्रण लेते हैं की सीघ्र ही "आवाज" नए रूप में ताजा तरीन रोचाज समाचारों के सात आपके सामने होगा|
संपादक: पवन सोंटी
9416191900
pawansonti@gmail.com

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Wednesday, March 4, 2015

पिहोवा में चैत्र चौदस मेला 18 से ...........


चैत्र चौदस मेले में पहली बार सरकारी विभागों की तरफ से लगेगी प्रदर्शनी

समाजसेवी संस्थाओं व पुराहितों को पहली बार जारी किए जाएंगे पहचान पत्र

 मेले की पल-पल की गतिविधियों पर रखेंगे 15 सीसी कैमरे नजर, मेले से पहले और बाद में स्वास्थ्य विभाग करेगा फोगिंग

पिहोवा 4 मार्च (पवन सोंटी)  पिहोवा की उपमंडल अधिकारी (ना.) डा. किरण सिंह ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध चैत्र चौदस मेले में देश व प्रदेश के कोने-कोने से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया जाएगा। इस मेले में पहली बार तमाम विभागों की तरफ से उपलब्धियों और योजनाओं को लेकर प्रदर्शनी लगाई जाएगी। सुरक्षा एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए जहां भिखारियों के लिए एक अलग स्थल निर्धारित किया जाएगा, वहीं राज पुरोहितों व समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को पहचान पत्र भी जारी किए जाएंगे। सरस्वती तीर्थ पर किसी भी भिखारी को भीख मांगने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं, सरस्वती तीर्थ के सामने बाजार लगाने पर भी पाबंदी रहेगी। 
 
एसडीएम मंगलवार को देर सायं किसान विश्रामगृह में 18 से 20 मार्च तक सरस्वती तीर्थ पर लगने वाले चैत्र चौदस मेले को लेकर पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मेले में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। मेले के हर क्षेत्र की पल पल पर निगरानी रखने के लिए 15 सी.सी. कैमरे लगाए जाएंगे। जहां मेले को 8 सैक्टरों में विभाजित किया जाएगा। वहीं शहर के हर प्रवेश द्वार पर पुलिस की नाकाबंदी कर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। पुलिस प्रशासन के अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी अधिकारी व कर्मचारी 20 मार्च को देर सायं तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए डयूटी पर तैनात रहेंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी की  उचित व्यवस्था ओर शौचालयों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सरस्वती तीर्थ में स्वच्छ जल भरने के आदेश भी दिए है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मेले से पहले और मेले के बाद में फोगिंग करवाना सुनिश्चित करेंगे। नगरपालिका के अधिकारी मेले से पहले और मेले के सात दिन बाद तक सफाई कर्मचारियों से सफाई व्यवस्था दुरुस्त करवाना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि शहर के मुख्य सडक़ से अतिक्रमण हटाने ओर क्षेत्र में अवैध शराब की ब्रिकी बंद करवाने के लिए पुलिस को विशेष आदेश दिए हैं। उन्होंने मेले के दौरान बिजली की निंरतर सप्लाई के इंतजाम करने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों को आदेश दिए हैं। इस मौके पर बीडीपीओ प्रताप सिंह, डीआईपीआरओ नरेंद्र सिंह, नपा सचिव निर्मल प्रकाश, जीवन सिंगला, मीनाक्षी आदि अधिकारी मौजूद थे। 

गोताखोरों के नाम और मोबाइल नम्बर किए जाएंगे अंकित

सरस्वती तीर्थ में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोरों की नियुक्ति की जाएगी। गोताखोरों को जैकेट मुहैया करवाई जाएगी और अलग काऊंटर भी दिया जाएगा। इस काऊंटर पर गोताखोरों के नाम व मोबाइल नम्बर अंकित किए जाएंगे। हालांकि गोताखोर 24 घंटे काऊंटर पर तैनात रहेंगे। मेले के दौरान आग आदि आपातकालीन स्थिति से निटापने के लिए फायर ब्रिगेड की 5 गाडिय़ों की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा सरस्वती घाट के दोनों तरफ गहरे पानी से बचाव करने के लिए 2 किश्तियां, लाइफ जैकेट व चप्पू का प्रबंध किया जाएगा। इसके अलावा सरस्वती तट पर चेतावनी सूचना पट भी लगाए जाएंगे। 

8 फस्र्ट एड पोस्ट व 5 एंबुलैंस करेगी सेवा 

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किसी भी अप्रिया घटना से निपटने ओर अचानक बीमार यात्रियों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने के लिए 8 फस्र्ट एड पोस्ट, 2 आयुर्वेदिक पोस्ट, 5 एंबुलैंस का प्रबंध किया जाएगा। मेले से पहले पूरे शहर में दवाईयों का छिडक़ाव भी किया जाएगा। 

600 पुलिस कर्मचारी रखेंगे सुरक्षा व्यवस्था पर नजर 

चैत्र चौदस मेले में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने के लिए करीब 600 पुलिस जवान, होम गार्ड तैनात रहेंगे। इनमें 100 महिला पुलिस कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाएगी। मेला क्षेत्र के 8 सैक्टरों में डयूटी मैजिस्टे्रट व सैक्टर अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। विभिन्न दिशाओं में 5 पुलिस चैक पोस्ट भी लगाए जाएंगे। 

मेला ग्राऊंड में बनेगा मनोरंजन स्थल    

गुहला रोड पर हुड्डा की खाली जमीन पर मेला ग्राऊंड बनाया गया है। इस ग्रांऊड में ही सर्कस, झूला व अन्य स्टाल लगाने की व्यवस्था की गई है। ताकि लोग एक ही स्थान पर मनोरंजन के साधनों का फायदा उठा सके। इस स्थल पर पुलिस व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम रहेंगे। 

130 अतिरिक्त सफाई क र्मचारियों की लगेगी डयूटी 

शहर में सफाई व्यवस्था का पूर्ण प्रबंध नगर पालिका द्वारा किया जाएगा। मेला को लेकर सफाई व्यवस्था को दुरूस्त रखने के लिए 130 अतिरिक्त सफाई कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा स्थाई कर्मचारी भी अपनी डयूटी का निर्वाह करेंगे। 

5 जगहों पर बनेंगे पार्किंग स्थल

एसडीएम ने कहा कि कैथल रोड, अम्बाला रोड, गुलडेरा, पटियाला रोड व कुरुक्षेत्र रोड पर पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। पार्किंग का टैंडर दिया जाएगा। ठेकेदारों को हिदायत दी जाएगी कि केवल उन्हीं वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूल किया जाए जो केवल पार्किंग स्थल पर ही खडे होंगे। सडक़ पर आने-जाने वालों से पार्किंग शुल्क नहीं वसूल किया जाएगा और न ही उनको परेशान किया जाएगा। 

विभागों की प्रदर्शनी रहेगी आकर्षण का केंद्र

एसडीएम ने कहा कि इस बार मेले में पहली बार महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, केडीबी, श्रीकृष्ण संग्रहालय, कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों की तरफ से प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी।

Tuesday, February 10, 2015

जरूर पढ़ें :- दिल्ली चुनाव पर ताजा टिप्पणी ...एन डी टी वी से साभार

प्रियदर्शन की बात पते की : विकराल बहुमत के खतरे





नई दिल्ली : दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने जो बहुमत हासिल किया है, वह विशाल नहीं, विकराल है। नरेंद्र मोदी की लहर को सुनामी बताने वाले अमित शाह को एहसास होगा कि वास्तविक राजनीतिक सुनामी दिल्ली में घटी। यहां सरकार बनाने की चंद कोशिशों के बीच लगातार दिल्ली के चुनाव टालती रही बीजेपी पा रही है कि उसके पास महज तीन सीटें हैं, जबकि आम आदमी पार्टी ने 95 फीसदी से ज़्यादा सीटें जीतकर शायद एक इतिहास बना दिया है - ऐसा इकतरफा बहुमत शायद ही कभी किसी को नसीब हुआ है।

लेकिन यह इकतरफा बहुमत ही वह खतरा है, जिससे आम आदमी पार्टी को सबसे पहले खुद को और फिर दूसरों को बचाना होगा। दलित नेता कांशीराम कभी कहा करते थे कि वह मज़बूत नहीं, मजबूर सरकारें चाहते हैं। ऐसी सरकारें बहुत निरंकुश नहीं हो पातीं। इस देश में मज़बूत सरकारों का अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा है। यह इंदिरा गांधी की मज़बूत सरकार थी, जिसने इमरजेंसी लगाई, यह राजीव गांधी की मज़बूत सरकार थी, जिसके कार्यकाल में अयोध्या के ताले खुले, बोफोर्स की धूल उड़ी और कई और अदूरदर्शी फैसले हुए।

राज्यों में भी मज़बूत सरकारों ने बहुत गुल खिलाए हैं। आम आदमी पार्टी के विकराल बहुमत का खतरा यही है। केजरीवाल खुद को पहले से ही अराजक बताते रहे हैं। इस अराजकता पर वह काबू पा भी लें तो अपने उन सहयोगियों को कैसे रोकेंगे, जिनके पास जोश ज़्यादा और होश कम रहा है। सोमनाथ भारती से लेकर राखी बिड़ला तक में हंगामा करने की भरपूर योग्यता रही है। इसके अलावा खुद केजरीवाल स्टिंग सिखाकर राज चलाना चाहने वाले मुख्यमंत्री रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनका विशाल बहुमत विधानसभा में भी उनके लिए कोई प्रतिरोध नहीं रहने देगा। ऐसा प्रतिरोध न रहने पर लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए नेता भी बड़ी तेज़ी से तानाशाह बनते हैं। केंद्र की एनडीए सरकार के भीतर इस तानाशाही के निशान कई मिलते हैं।

अच्छी बात यह है कि आम आदमी पार्टी के कुनबे में एक समाजवादी धारा भी है। यह समाजवादी धारा 'आप' से उम्मीद की असली वजह बन सकती है। दूसरी वजह इस पहली वजह से ही सामने आती है। पिछले कुछ वर्षों में केजरीवाल ने जितना जुझारूपन दिखाया है, उतना ही लचीलापन भी। कभी राजनीति न करने की कसम न खाने वाले केजरीवाल ने राजनीति में पांव रखे और कई बार ज़रूरत के दबाव में बदलते दिखे। उम्मीद करें कि यह बदला हुआ बहुमत केजरीवाल और उनके सहयोगियों को विनम्र भी बनाएगा, ज़िम्मेदार भी और अंतत: सामाजिक न्याय और बराबरी के प्रति संवेदनशील भी।

Wednesday, December 24, 2014

एक दिन में तीन किसान देते हैं जान

BBC से साभार 

  • 23 दिसंबर 2014
मराठवाड़ा की ग्रामीण  महिलाएं
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाक़े में किसान आत्महत्याओं का मुद्दा गंभीर हो चुका है.
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यहां औसतन रोज़ तीन किसान आत्महत्या कर रहे हैं. इस साल नवंबर तक 450 किसान ख़ुदकुशी कर चुके थे.
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसान सूखे के कारण मर रहे हैं और सूखे को और गंभीर बना रही हैं शक्कर मिलें.
तीन साल से लगातार सूखा झेल रहे लोग गांवों से पलायन कर रहे हैं. बेटियों का ब्याह नहीं हो पा रहा है, क्योंकि कर्जे से दबे किसान कंगाल हो चुके हैं.

पूरी रिपोर्ट

गणेश
महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले का दाभरूल गांव लगभग आधा रह गया है, जिनमें ज़्यादातर औरतें और बूढ़े हैं.
गिने-चुने लोगों में एक गौतम वावले बताते हैं, "हमारे लगभग 40 प्रतिशत लोग पानी न होने के कारण गांव छोड़कर चले गए हैं. अब जो भी काम मिलेगा, हम करने को तैयार हैं."
दाभरूल औरंगाबाद मराठवाड़ा के उन हज़ारों से अधिक गांवों में एक है, जो पानी की भारी किल्लत से परेशान हैं.
लगातार तीन साल तक बारिश न होने और खेतों में पैदावार न के बराबर होने से कई लोग घर छोड़कर चले गए हैं.
पैठण तहसील के हर्षी गांव के किसान अंकुश घायाल ने लगभग एक महीना पहले आत्महत्या की थी.
उनके 12वीं पास बेटे गणेश को इस कारण अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी.

पलायन

ग्रामीण
समस्याओं को हल करने की बजाय आरोप-प्रत्यारोप जारी है.
गणेश बताते हैं, "हमारी पांच एकड़ जमीन है, जिसमें अनार और ज्वार होते थे. लेकिन कुओं में भी पानी नहीं है. कर्ज़े में डूबे होने के कारण मेरे पिता ने आत्महत्या की. अब उनके बाद मुझे ही यह संभालना पड़ रहा है क्योंकि मेरा भाई अभी दसवीं में पढ़ रहा है."
मराठवाड़ा के विभागीय आयुक्त कार्यालय के अनुसार, नवंबर के आखिर तक इलाक़े के 422 किसानों ने आत्महत्या की थी, जिनमें सबसे ज़्यादा 122 बीड़ में हुईं. हर दिन कम से कम तीन आत्महत्याएं दर्ज हो रही हैं.
अब तक यह आंकड़ा 450 को पार कर चुका है. पिछले एक सप्ताह में यहां के 100 से अधिक किसान अपना जीवन समाप्त कर चुके हैं.
ग्रामीणों के मुताबिक़ यहां के लगभग 100 किसान परिवार गन्ने की कटाई के लिए मज़दूरों के रूप में काम करने चले गए हैं.
नतीजा ये कि गांवों में घर-घर ताले लगे हैं. इस क्षेत्र के बाक़ी ज़िलों नांदेड़, बीड़, उस्मानाबाद, परभणी, जालना, लातूर और हिंगोली में भी कमोबेश ऐसे ही हालात हैं.

राजनीति

मराठवाड़ा, सूखे की समस्या
नांदेड़ के विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने किसानों की आत्महत्या का मामला लोकसभा में उठाया, पर केंद्रीय कृषी मंत्री राधा मोहन सिंह ने जवाब दिया कि इस समस्या के लिए पूर्व की सरकारें ज़िम्मेदार हैं.
मराठवाड़ा के इन भयानक हालात का मुद्दा विधानसभा के नागपुर सत्र में भी उठा. हंगामे के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने 7,000 करोड़ रुपए का पैकेज जारी किया.
यह पैकेज किसानों के कर्ज़ की माफ़ी को लेकर था, लेकिन मराठवाड़ा की पानी की समस्या की ओर अधिक ध्यान नहीं दिया गया.
ऐसा पैकेज पहले विदर्भ को भी दिया जा चुका है, लेकिन वो कहां ख़र्च हुआ और उसका क्या असर हुआ, इसके बारे में ज़्यादा जानकारी किसी को नहीं.

शक्कर मिलें

पानी की समस्या
जायकवाडी पानी नियोजन एवं संघर्ष समिति के नेता जयाजीराव सूर्यवंशी के मुताबिक़, "जो पानी जायकवाडी बांध में आना है, उसी से अहमदनगर ज़िले के 100 गांव और पांच शक्कर कारखाने चलते हैं."
वह कहते हैं, "नाम तो शक्कर का है, लेकिन असल में ये कारखाने शराब बनाते हैं और सारा किया-धरा उसी के लिए है. मराठवाड़ा में किसानों की बढ़ती आत्महत्याएं इसी नीति का परिणाम हैं. ये आत्महत्याएं नहीं हैं, ये सरकार की ग़लत नीतियों का परिणाम हैं. इसके लिए शक्कर सम्राटों की राजनीति ज़िम्मेवार है."
रेगिस्तान हो चुके गांवों की समस्या अब सामाजिक हो चली है. कई गांवों में तीन-तीन वर्षों से लड़कियों की शादी नहीं हुई, क्योंकि किसानों के पास उनकी शादी के लिए पैसा ही नहीं है.
गांवों में कोई लड़की ब्याहने को तैयार नहीं, क्योंकि पानी एक बड़ी समस्या है.
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Tuesday, November 18, 2014

दैनिक भास्कर से साभार .."हरियाणा के सतलोक आश्रम में नरबलि का आरोप"

संत रामपाल के आश्रम से कापरड़ा के युवक का क्षत-विक्षत शव मिला था

Bhaskar News Network|Nov 18, 2014, 02:20AM IST

संत रामपाल के आश्रम से कापरड़ा के युवक का क्षत-विक्षत शव मिला था
 

कोर्ट ने कहा पुलिस मामला फिर जांच रिपोर्ट दे बलि देने गांव के तीन लोग अपहरण कर हरियाणा ले गए 


कापरड़ानिवासी महेंद्र खारवाल वर्ष 2013 में अपने पिता के अपहरण का मामला दर्ज करवाने पुलिस के पास गया था। पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं करने पर उसने कोर्ट की मदद ली। कोर्ट के आदेश पर 25 जून 2013 को मामला दर्ज हुआ। महेंद्र ने रिपोर्ट में अपने ही गांव के महेश मेवाड़ा, उसकी मां जशोदा सोनकी पर अपने पिता जगदीशराम का अपहरण कर बरवाला स्थित सतलोक आश्रम ले जाने का आरोप लगाया। साथ ही वहां के संत रामपाल के साथ मिलकर संतान प्राप्ति के लिए नरबलि के उद्देश्य से जगदीश की हत्या करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस मामले में 27 मार्च 2014 को एफआर लगा दी थी। इस पर महेंद्र फिर कोर्ट पहुंचा और वकील दिलीपसिंह के माध्यम से पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए कई तथ्य रखे। इन तथ्यों पर सहमति जताते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मनीषा चौधरी ने पुलिस को दुबारा जांच के आदेश दिए हैं। 

भास्कर न्यूज | कापरड़ा (जोधपुर) 

कोर्टके आदेश के बावजूद पुलिस से नहीं पकड़े जा रहे हरियाणा के संत रामपाल के खिलाफ कापरड़ा के जगदीशराम खारवाल का अपहरण कर नरबलि देने का मामला जून-2013 में पुलिस में दर्ज हुआ था। पुलिस ने मार्च-2014 में इस पर एफआर भी लगा दी। मृतक के बेटे की गुहार पर अब बिलाड़ा कोर्ट ने एफआर को नामंजूर करते हुए जोधपुर पुलिस (ग्रामीण) के डीएसपी को मामले की फिर से जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके लिए उन्हें दो माह का समय दिया है। 

अंगुलीकाटी, सलाखों से दागा धारदार हथियारों से ली जान 

रिपोर्टके अनुसार महेंद्र 10 जून 2013 को बरवाला पुलिस के साथ सतलोक आश्रम पहुंचा तो वहां एक कोठड़ी में जगदीशराम का क्षत-विक्षत शव मिला। उसके एक पैर की अंगुली कटी थी पैर को दागा हुआ था। हाथ-पैर बंधे शव के कनपटी, सीने, दोनों हाथ, कंधे गर्दन पर धारदार हथियारों से कई वार किए गए थे। 

भास्कर न्यूज नेटवर्क. बरवाला | अवमाननाके दोषी संत रामपाल की गिरफ्तारी के लिए सोमवार को पांच घंटे तक ड्रामा चलता रहा। हरियाणा पुलिस फोर्स और संत समर्थक आमने-सामने रहे। 

Monday, November 17, 2014

रामपाल को राहत और सरकार के लिए आफत 21 तक और ....नवभारत टाइम्स से साभार

बच्चों, महिलाओं ढाल बनाकर ड्रामा कर रहा है रामपाल: हाई कोर्ट

आश्रम के प्रवक्ता ने कहा कि अगर पुलिस संत रामपाल को जबरन ले जाने का प्रयास करेंगी तो उसे पहले हमारी जानें लेनी होंगी। 
आश्रम के प्रवक्ता ने कहा कि अगर पुलिस संत रामपाल को जबरन ले जाने का प्रयास करेंगी तो उसे पहले हमारी जानें लेनी होंगी। 
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बरवाला (हरियाणा)

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अवमानना के मामले में पेश होने से इनकार करने वाले विवादित और स्वयंभू संत रामपाल को ड्रामेबाज करार दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि रामपाल बच्चों और महिलाओं को ढाल बना रहा है और ड्रामा कर रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार भी लगाई है। इस मामले पर अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी। गौरतलब है कि रामपाल को आज हाई कोर्ट में पेश होना था, लेकिन खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनके वकील ने मेडिकल सर्टिफिकेट पेश कर दिया।

रामपाल के वकील की तरफ से हाई कोर्ट में आज मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करके कहा गया कि वह खुद पेश होने की स्थिति में नहीं हैं। इस पर अदालत ने कहा कि रामपाल बच्चों और महिलाओं को कवच बना रहा है और ड्रामा कर रहा है। मगर साथ ही अगली सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तारीख तय कर दी। हाई कोर्ट ने हरियाणा की खट्टर सरकार को भी मामले में ढील बरतने पर फटकार लगाई।


विवादित और स्वयंभू संत रामपाल ने आज पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सामने पेश होने से इनकार कर दिया था। रामपाल के करीबियों का कहना है कि खराब सेहत की वजह से वह अवमानना के केस में कोर्ट में पेश नहीं हो पाए। अदालत में उनकी पेशी की समयसीमा आज समाप्त हो गई थी। इससे पहले गिरफ्तारी को लेकर गतिरोध के बीच संत रामपाल की ओर से रविवार देर रात कहा गया था कि वह हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करेंगे और अगर स्वास्थ्य ने साथ दिया तो वह सोमवार को कोर्ट के सामने उपस्थित भी होंगे।

रामपाल के सतलोक आश्रम में गतिरोध जारी रहने के बीच सुबह उनके प्रवक्ता ने कहा कि वह (रामपाल) चंडीगढ़ जाने की स्थिति में नहीं हैं और विडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हो सकते हैं। प्रवक्ता राज कपूर ने कहा, 'वह (रामपाल) यात्रा करने की स्थिति में नहीं हैं। हम मेडिकल सर्टिफिकेट हाई कोर्ट के सामने प्रस्तुत करेंगे।' उन्होंने कहा कि अदालत से रामपाल की स्थिति सुधरने तक दूसरी तारीख की मांग की जाएगी।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पिछले सोमवार को रामपाल के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में ताजा गैर-जमानती वॉरंट जारी कर पूछा था कि 2006 के हत्याकांड मामले में क्यों न उनकी जमानत रद्द की जाए।

आश्रम के प्रवक्ता ने पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच किसी प्रकार की झड़प से इनकार किया। प्रवक्ता ने चेतावनी दी, 'हमने यह पहले भी कहा है और अभी भी कह रहे हैं, हम पुलिस के साथ किसी झड़प में नहीं उलझेंगे। हालांकि अगर वे संत रामपाल को जबरन ले जाने का प्रयास करेंगे तो उन्हें पहले हमारी जानें लेनी होंगी।'

अधिकारियों ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से तय समय सीमा को देखते हुए सतलोक आश्रम के नजदीक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। आश्रम को पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने घेर रखा है और परिसर की तरफ जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया गया है। हालांकि रामपाल को गिरफ्तारी से बचाने के लिए महिलाएं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में उसके समर्थक वहां मौजूद हैं।

रामपाल पर हिसार सेशंस कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के आरोप हैं। 15 जुलाई को उनके समर्थक हिसार में जिला अदालत परिसर के अंदर घुस गए और अदालत की कार्यवाही में बाधा डालने का प्रयास किया। हाई कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और रामपाल एवं राज्य सरकार को नोटिस जारी किए। उनके अदालत में उपस्थित नहीं होने पर पिछले हफ्ते अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किए और हरियाणा सरकार से कहा कि उन्हें और उनके शिष्य रामकुंवर ढाका को अदालत में पेश किया जाए।