Thursday, October 15, 2015

पंचायत चुनावः तीसरे दिन कोर्ट ने सरकार से पूछा-संशोधन के बाद कितने उम्मीदवार मिले योग्य?


http://www.bhaskar.com/news/c-85-1141776-pa0345-NOR.html?version=4


पानीपत। हरियाणा पंचायतीराज (संशोधन) कानून-2015 को को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगातार तीसरे दिन गुरुवार को सुनवाई जारी है। कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछते हुए आंकड़ा मांगा है कि संशोधन के बाद कितने उम्मीदवारों नामांकन भरा है? और कितने उम्मीदवार योग्य मिले हैं। बुधवार की सुनवाई को दौरान भी कोर्ट ने नई शर्तों पर कई सवाल उठाए थे। इनमें कई सवालों के जवाब सरकार नहीं दे पाई। उसे अदालत से समय मांगना पड़ा था। इसलिए अदालत से सुनवाई एक दिन के लिए आगे बढ़ा दी थी। आज की सुनवाई चल रही है।

बुधवार को ये पूछे थे सवाल

बिजली बिल पर पूछा- गांवों में बिल देर से पहुंचता है। कोई व्यक्ति बिल भरने से चूक जाता है, उसका एक रुपया बिल है तो क्या वह चुनाव नहीं लड़ सकता?

प्रदेश सरकार- अदालत के कई सवालों का मौके पर ही जवाब नहीं दे पाए अटॉर्नी जनरल। संभवत: गुरुवार को सरकार कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेगी।

सरकार- पंचायती संस्थाओं, खासकर सरपंच के पास कार्यकारी शक्तियां होती हैं, इसलिए प्रतिनिधियों का पढ़ा-लिखा होना जरूरी है।

अदालत- कार्यकारी शक्तियों के निर्वाहन के लिए क्या 5वीं, 8वीं और 10वीं पास होना ही पर्याप्त है?

अदालत- क्या नगर निकायों में ये शर्तें लागू है?

सरकार- नहीं।

अदालत- एक्ट में संशोधन का प्रावधान किया क्या?

सरकार- नहीं।

अदालत- तो क्या आप सिर्फ गांवों में ही सुधार करना चाहते हैं?

–--------सुनवाई अभी जारी है।

Tuesday, June 30, 2015

आखिर क्या है सरस्वती नदी का राज? Pawan Sonti

आखिर क्या है सरस्वती नदी का राज?
अरब सागर में या फिर बंगाल की खाड़ी में आखिर कहाँ मिलती है इसकी जल धारा?
कुरुक्षेत्र (पवन सोंटी)
सरस्वती नदी आदि काल से भारत के जनमानस की चेतना में बसती आई है| आस्था का केंद्र बिंदु रही यह नदी अपने आप में कई तरह के रह्श्य भी समेटे है| आज इस विषय पर चिंतन करने का कारन है केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती द्वारा दिया गया बयान| उनके अनुसार सरस्वती इलाहाबाद के संगम तट पर बहती थी| जबकि आश्चर्यजनक बात ये है की हरियाणा में शिवालिक पहाड़ियों की तलहट्टी में यमुनानगर जिला के आदि बदरी नामक स्थान पर सरस्वती के उद्गम स्थाल पर जो जानकारी लिखी है उसके अनुसार यह सरस्वती वैदिक सरस्वती है जोकि राजस्थान से होते हुए अरब सागर में जाकर मिलती है| रोचक बात ये है कि आदि काल से चली आ रही कथाओं के अनुसार सरस्वती इलाहाबाद में गंगा और यमुना के साथ संगम बनती है| इसको लेकर फिल्मों में गाने तक भी गाये गए| अब आम आदमी के लिए यह एक उलझन वाला सवाल है की आखिर क्या है इस सरस्वती का राज?


विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार:-
उद्गम स्थल तथा विलुप्त होने के कारण
महाभारत में मिले वर्णन के अनुसार सरस्वती नदी हरियाणा में यमुनानगर से थोड़ा ऊपर और शिवालिक पहाड़ियों से थोड़ा सा नीचे आदिबद्री नामक स्थान से निकलती थी। आज भी लोग इस स्थान को तीर्थस्थल के रूप में मानते हैं और वहां जाते हैं। किन्तु आज आदिबद्री नामक स्थान से बहने वाली नदी बहुत दूर तक नहीं जाती एक पतली धारा की तरह जगह-जगह दिखाई देने वाली इस नदी को ही लोग सरस्वती कह देते हैं। वैदिक और महाभारत कालीन वर्णन के अनुसार इसी नदी के किनारे ब्रह्मावर्त था, कुरुक्षेत्र था, लेकिन आज वहां जलाशय हैं। जब नदी सूखती है तो जहां-जहां पानी गहरा होता है, वहां-वहां तालाब या झीलें रह जाती हैं और ये तालाब और झीलें अर्ध्दचन्द्राकार शक्ल में पायी जाती हैं। आज भी कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर यापेहवा में इस प्रकार के अर्ध्दचन्द्राकार सरोवर देखने को मिलते हैं, लेकिन ये भी सूख गए हैं। लेकिन ये सरोवर प्रमाण हैं कि उस स्थान पर कभी कोई विशाल नदी बहती रही थी और उसके सूखने के बाद वहां विशाल झीलें बन गयीं। भारतीय पुरातत्व परिषद् के अनुसार सरस्वती का उद्गम उत्तरांचल में रूपण नाम के हिमनद (ग्लेशियर) से होता था। रूपण ग्लेशियर को अब सरस्वती ग्लेशियर भी कहा जाने लगा है। नैतवार में आकर यह हिमनद जल में परिवर्तित हो जाता था, फिर जलधार के रूप में आदिबद्री तक सरस्वती बहकर आती थी और आगे चली जाती थी।
वैज्ञानिक और भूगर्भीय खोजों से पता चला है कि किसी समय इस क्षेत्र में भीषण भूकम्प आए, जिसके कारण जमीन के नीचे के पहाड़ ऊपर उठ गए और सरस्वती नदी का जल पीछे की ओर चला गया। वैदिक काल में एक और नदी दृषद्वती का वर्णन भी आता हैं। यह सरस्वती नदी की सहायक नदी थी। यह भी हरियाणा से हो कर बहती थी। कालांतर में जब भीषण भूकम्प आए और हरियाणा तथा राजस्थान की धरती के नीचे पहाड़ ऊपर उठे, तो नदियों के बहाव की दिशा बदल गई। दृषद्वती नदी, जो सरस्वती नदी की सहायक नदी थी, उत्तर और पूर्व की ओर बहने लगी। इसी दृषद्वती को अब यमुना कहा जाता है, इसका इतिहास 4,000 वर्ष पूर्व माना जाता है। यमुना पहले चम्बल की सहायक नदी थी। बहुत बाद में यह इलाहाबाद में गंगा से जाकर मिली। यही वह काल था जब सरस्वती का जल भी यमुना में मिल गया। ऋग्वेद काल में सरस्वती समुद्र में गिरती थी। जैसा ऊपर भी कहा जा चुका है, प्रयाग में सरस्वती कभी नहीं पहुंची। भूचाल आने के कारण जब जमीन ऊपर उठी तो सरस्वती का पानी यमुना में गिर गया। इसलिए यमुना में यमुना के साथ सरस्वती का जल भी प्रवाहित होने लगा। सिर्फ इसीलिए प्रयाग में तीन नदियों का संगम माना गया जबकि भूगर्भीय यथार्थ में वहां तीन नदियों का संगम नहीं है। वहां केवल दो नदियां हैं। सरस्वती कभी भी इलाहाबाद तक नहीं पहुंची।

उमा भारती कहती हैं:- इसरो ने दिए संकेत, संगम पर बहती थी सरस्वती
 इलाहाबाद के संगम तट पर इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने सरस्वती नदी बहने के संकेत दिए हैं। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती के मुताबिक राजस्थान और हरियाणा में इस बात के पहले ही साक्ष्य मिल चुके हैं। अब इलाहाबाद की बारी है। हालांकि इसके लिए अभी छह महीने का इंतजार करना पड़ेगा। अभी कुछ और साक्ष्यों की जरूरत है। इसके बाद ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इलाहाबाद के सर्किट हाउस में नमामि गंगेप्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देने आईं केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने संवाददाताओं को बताया कि इलाहाबाद में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। लंबे समय से इस सरस्वती नदी को खोजने का काम चल रहा था। वर्ष 2002 में इसके लिए प्रोजेक्ट सरस्वतीबना। ग्रांउड वाटर बोर्ड और इसरो इस दिशा में काम भी कर रहे हैं। संयोग से ग्रांउड वाटर बोर्ड का मंत्रालय मेरे ही पास है। मंत्री बनने के बाद मैने इस दिशा में सरस्वती नदी की खोज के काम में तेजी लाने को कहा। इस दौरान इसरो की मदद से इलाहाबाद किले में जो सरस्वती कूप है कि उसमें सरस्वती नदी की धारा की वास्तविकता जानने के लिए काम करने को कहा गया। इसरो ने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि कूप में सरस्वती की धारा हो सकती है। अब स्पेस टेक्नोलॉजी की मदद से अगर जल की धारा मिल जाती है तो यह देखा जाएगा कि वह धरती के कितने नीचे है।

क्या सच में मिली सरस्वती की जलधारा?
 धरती के नीचे सरस्वती के बहने की कथा हम भी बचपन से सुनते आ रहे हैं, लेकिन इसके प्रमाण अभी पुख्ता नहीं हुए हैं| इसके बावजूद सरस्वती नदी की खुदाई के दौरान गत दिनों यमुनानगर जिला के गाँव मुगलवाली में जमीन के गर्भ में छुपा पानी क्या मिल गया कि हमने सरस्वती की जलधारा के मिलने का ढिंढोरा ही पीट डाला, ठीक उसी तरह जैसे कि गत वर्ष उत्तर प्रदेश में राजा का दबा खजाना मिलने का ढिंढोरा दुनिया में पिटा था और वहां खुदाई तक कर डाली गई थी| सरस्वती की खुदाई के दौरान पानी मिलने की घटना को कुछ ऐसे प्रचारित किया गया मानो जमीन से धार फूट पड़ी हो फूटी सरस्वती की जलधारा| जहाँ तक मेरे याद आता है की बिलासपुर- सढोरा के क्षेत्र में जमीन में कई जगह 7-8 फूट पर पहला जलस्तर आ जाता है जिसे हम ग्रामीण भाषा में चोवा कहते हैं| यह उतना ज्यादा तो नहीं होता की इससे नलकूप लगाकर खेतों की सिंचाई की जा सके, लेकिन खड्डा खोदने पर उसमे पानी एकत्रित हो जाता| मेरे याद है की करीब बीस साल पहले सढोरा के निकटवर्ती गाँव सरांवी में मेरे भांजे रंधीर सिंह ने खेत में समतल करते हुए जब ट्रैक्टर से 5-6 फूट तक मिटटी खींच डाली थी तो जमीन से पानी निकल आया था| यही कारन रहा है की इस क्षेत्र में नलकूप के कुंए कभी कामयाब नहीं रहे| पहले चोवे का पानी कुँए से रिस रिसकर उसमे भर जाता था जिस कारण नीचे मोटरें डूब जाती थी| जब सबमर्सिबल तकनीक नहीं आई थी तो लोग इस क्षेत्र में टर्बाइन से पानी निकालते थे| हालांकि मैं सरस्वती के मौजूदगी को नहीं नकार रहा, लेकिन मुझे लगता है की बहुकोणीय जांच होनी चाहिए| आखिर यह हिन्दुओं की आस्था से साथ देश की पौराणिक संसिकृति से जुडा मुद्दा है|  


Thursday, April 23, 2015

थानेसर व लाडवा पंचायत समितियों के वार्डो आरक्षण की सूची जारी, जिलापरिषद का ड्रा स्थगित


थानेसर पंचायत समिति में 8 व लाडवा में 4 वार्डो को अनुसूचित जाति के लिए किया आरक्षित, थानेसर में 30 और लाडवा में 16 वार्डो के आरक्षण के ड्रा निकाले

कुरुक्षेत्र 23 अप्रैल (पवन सोंटी)
 उपायुक्त सीजी रजिनिकांतन ने कहा कि पंचायत समिति थानेसर के वार्डों की वर्ष 2015 की अंतिम प्रकाशन सूची में वार्ड नं. 19, 8, 15, 21, 28, 30, 3, 17 में अनुसूचित जाति की जनसंख्या व प्रतिशतता सर्वाधिक है। इसलिए इन वार्डों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। इसी प्रकार लाडवा में वार्ड नम्बर 7, 6, 8 व 15 को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया हैं।
उपायुक्त ने कहा कि वीरवार को थानेसर व लाडवा पंचायत समिति के वार्डो का आरक्षण कार्य एसडीएम थानेसर सतबीर कुंडू की देखरेख में किया गया। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। वार्ड न. 3 वर्ष  2010 के पंचायत आम चुनाव में महिला के लिए आरक्षित रह चुका है। इसी प्रकार वार्ड न. 8 वर्ष 2000 व 2010 के पंचायत आम चुनाव में महिला के लिए आरक्षित रह चुका है। इसी प्रकार वार्ड न. 17 वर्ष 2000 से 2010 में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित रह चुका है, वार्ड न. 19 वर्ष 2010 में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित रह चुका है। इसी प्रकार वार्ड न. 21 वर्ष 2000 व 2010 में महिला के लिए, वार्ड न. 15 वर्ष 1994 में महिला के लिए, वार्ड न. 30 वर्ष 2000 व 2005 में महिला के लिए आरक्षित रह चुका है। वार्ड न. 28 किसी भी आम चुनाव में महिला के लिए आरक्षित नहीं रहा गया। इसलिए वार्ड न. 28 को रोटेशन के तहत अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है। अत: आरक्षण के प्रावधानों को मध्यनजर रखते हुए वार्ड न. 3, 8, 15, 17, 19, 21 व 30 का ड्रा किया गया, जिसमें से वार्ड न. 15 व वार्ड न. 30 को अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण के लिए पंचायत समिति थानेसर के लिए एक स्थान का प्रावधान है। पंचायत समिति थानेसर के वार्डों की वर्ष 2015 की अंतिम प्रकाशन सूची में वार्ड न. 25 में पिछड़े वर्ग की सर्वाधित जनसंख्या है। अत: वार्ड न. 25 पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। उपरोक्त प्रक्रिया सम्पन्न करने उपरांत पंचायत समिति थानेसर के वार्ड न. 1, 2, 4, 5, 6, 7, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 16, 18, 20, 22, 23, 24, 26, 27 व 29 शेष रह जाते हैं, जोकि अनारक्षित हैं। उपरोक्त वार्डों में से 7 स्थान महिला के लिए आरक्षित किये जाने हैं। मौके पर बताया गया कि वार्ड न. 20, 23 व 26 जो वर्ष 1994 से लेकर वर्ष 2010 तक सम्पन्न हुए। पंचायत आम चुनाव में महिलाओं के लिए कभी भी आरक्षित नहीं रहे हैं। वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव हरियाणा सरकार विकास एवं पचंायत विभाग द्वारा जारी पत्र क्रमांक ईसीए-1-2014/71599-71619 दिनांक 20.11.2014 में आरक्षण पंचायत समिति के बारे में दिए गए प्रावधानों के अनुसार पहले इन वार्डों को महिला के लिए आरक्षित किया गया है। अत: इन वार्डों को छोडक़र शेष बचे वार्ड न. 1, 2, 4, 5, 6, 7, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 16, 18, 22, 24, 27 व 29 में से महिलाओं के स्थान आरक्षण के लिए ड्रा निकाला गया। ड्रा आफ लॉट की प्रक्रिया प्रारंभ की गई तथा ड्रा आफ लॉट के फलस्वरूप वार्ड न. 2, 5, 14 व 16 महिला के आरक्षित किए गये हैं।
एसडीएम  थानेसर सतबीर कुंडू ने बताया कि पंचायत समिति लाडवा के वार्डों की वर्ष 2015 की अंतिम प्रकाशन सूची में वार्ड न. 7, 6, 8, 15 में अनुसूचित जाति की जनसंख्या व प्रतिशतता सर्वाधित है। अत: उक्त वार्डों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। तदोपरांत उपरोक्त वर्णित वार्डों में से अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। उन्होंने बताया कि वार्ड न. 7 वर्ष 2010 के पंचायत आम चुनाव में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित रह चुका है। इसी प्रकार वार्ड न. 6 वर्ष 2000 व 2005 के पचंायत आम चुनाव में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित रह चुका है। इसी प्रकार वार्ड न. 8 वर्ष 2010 में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित रह चुका है व वार्ड न. 15 वर्ष 2010 में सामान्य महिला के लिए आरक्षित हो चुका है। अत: आरक्षण के प्रावधानों को मध्यनजर रखते हुए वार्ड न. 6, 7, 8 व 15 का ड्रा किया गया, जिसमें से वार्ड न. 7 व वार्ड न. 8 को अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण के लिए पंचायत समिति लाडवा के लिए एक स्थान का प्रावधान है। पंचायत समिति लाडवा के वार्डों की वर्ष 2015 की अंतिम प्रकाशन सूची में वार्ड न. 10 में पिछड़े वर्ग की सर्वाधिक जनसंख्या है। अत: वार्ड न. 10 पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। उपरोक्त प्रक्रिया सम्पन्न करने उपरांत पंचायत समिति लाडवा के वार्ड न. 1, 2, 3, 4, 5 , 9, 11, 12, 13, 14 व 16 शेष रह जाते हैं जो कि अनारक्षित हैं। उन्होंने बताया कि उपरोक्त वार्डों में से 4 स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने हैं। मौके पर बताया गया कि वार्ड न. 1, 2 व 16 जो वर्ष  1995 से लेकर वर्ष 2010 तक सम्पन्न हुए, पंचायत आम चुनाव में महिलाओं के लिए कभी भी आरक्षित नहीं रहे हैं। वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव हरियाणा सरकार विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा जारी पत्र क्रमांक इसीए-1-2014/71599-71619 दिनांक 20.11.2014 में आरक्षण पंचायत समिति के बारे में दिए गए प्रावधानों के अनुसार पहले इन वार्डों को महिला के लिए आरक्षित किया जाता है। अत: इन वार्डों को छोडक़र शेष बचे वार्ड न. 3, 4, 5, 9, 11, 12, 13 व 14 में से महिलाओं के स्थान आरक्षण के लिए ड्रा निकाला गया। ड्रा आफ लॉट की प्रक्रिया प्रारंभ की गई तथा ड्रा आफ लॉट के फलस्वरूप वार्ड न. 5 महिला के आरक्षित किए जाते हैं।