Wednesday, November 1, 2017

हिमाचल में कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी, किसानों को फ्री लोन, छात्रों को लैपटाप का किया वादा

हिमाचल में कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी, किसानों को फ्री लोन, छात्रों को लैपटाप का किया वादा


शिमला (उत्तम हिन्दू न्यूज): हिमाचल में विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी महौल गर्मा गया है। वहीं कांग्रेस ने आज चुनावों के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। जिसमें मतदाताओं को रिझाने के लिए कई लुभावने वादे किए गए है। बुधवार को घोषणा पत्र कमेटी के चेयरमैन ठाकुर कॉल सिंह ने मेनिफेस्टो जारी किया। घोषणा पत्र में छोटे किसानों को बिना ब्याज के लोन और स्कूली छात्रों को लैपटॉप देने का वादा किया गया है।

कांग्रेस ने डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार और मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देने की घोषणा की है। घोषणा पत्र जारी करते हुए राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री और वीरभद्र सिंह ने कहा कि 5 सालों में हमने जो वादे किए थे वो 95 प्रतिशत पूरे किए हैं। हिमाचल प्रदेश में दोबारा सत्ता में वापसी पर उनकी पार्टी छोटे किसानों को एक लाख रुपये तक बिना ब्याज के कर्ज देगी। हर गांव को सड़कों से जोड़ा जाएगा। पार्टी ने वादा किया कि डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। वीरभद्र ने कहा कि सत्ता में वापसी पर दिहाड़ी मजदूरों को 350 रुपये मजदूरी मिलेगी। बुजुर्गों की पेंशन भी बढ़ाई जाएगी। 

घोषणा पत्र की मुख्य बातें:
-मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाकर 350 रुपये की जाएगी।
-2 साल के कांट्रेक्ट नौकरीपेशा लोगों को रेगुलर किया जाएगा।
-छोटे किसानों को बिना ब्याज के 1 लाख रुपये तक का लोन मिलेगा।
- रोजगार के लिए डेढ़ लाख तक नौकरियां दी जाएंगी।
- स्कूली छात्रों को 1 जीबी फ्री डेटा के साथ 50 हजार लैपटॉप।
-जंगली जानवरों से बचने के लिए ठोस नीति बनाई जाएगी।
-नये खोले गए स्कूलों ओर कॉलेजों में स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश में एक ही चरण में 9 नवंबर को 68 सीटों पर वोटिंग होगी और 18 दिसंबर को परिणाम घोषित किया जाएगा।

Monday, October 30, 2017

जारी है डेंगू का प्रकोप, आइये जानें इसके लक्षण, उपचार व सावधानियाँ.......



जारी है डेंगू का प्रकोप
आइये जानें इसके लक्षण, उपचार व सावधानियाँ.......  
कुरुक्षेता, 30 अक्तूबर 2017: इन दिनों देश भर में डेंगू ने कहर बरपा रखा है। सैंकड़ों लोगों की जान जा चुकी है तो हजारों पीड़ित अस्पतालों में भर्ती हैं। पहले हम देशभर में डेंगू की स्थिति पर चर्चा करते हैं।
इसकी गंभीरता को लेकर केंद्र सरकार भी चिंतित है और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा तमिलनाडु में तो डेंगू बुखार के प्रकोप को लेकर केंद्रीय दल भी भेजा गया जिसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी), नई दिल्ली, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), नई दिल्ली के डॉक्टर शामिल थे। मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 2017 (12.10.2017 तक) के दौरान तमिलनाडु में कुल 12324 डेंगू के मामलें दर्ज किए गए और डेंगू के कारण 18 लोगों की मृत्यु हुई।

यही नहीं 27 सितंबर 2017 की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जम्मू संभाग में डेंगू के मरीजों की संख्या विगत एक महीने में 145 तक पहुँच चुकी है। पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में हजारों लोग डेंगू की चपेट में हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। स्वास्थ्य विभाग डेंगू की रोकथाम और रोगियों के बेहतर उपचार करने में जुटा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब तक डेंगू के 18238 मामले सामने आये हैं जबकि 35 लोगों की मौत हुई है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव के अनुसार महाराष्ट्र में मच्छर जनित रोगों व स्वाइन फ्लू से अब तक 685, गुजरात में 434 राजस्थान में 230, उत्तर प्रदेश में 165, मध्य प्रदेश में 140 और केरल में 130 लोगों की मौत हुई है। मुख्य सचिव ने तर्क दिया है कि राज्य में बुखार के सभी मामले डेंगू के नहीं हैं।
पंजाब सरकार चला रही है डेंगू फ्री एप्प:
डेंगू बुखार व चिकनगुनिया बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए पंजाब के स्वास्थ्य विभाग ने 'डेंगू फ्री पंजाब' एप्प तैयार किया है। इस एप में डेंगू व चिकनगुनिया रोग के वाहक एडीज एजिप्ट मच्छर के पैदा होने से लेकर उससे बचाव से संबंधित हर तरह की जानकारी है। विभाग का दावा है कि पंजाब पहला प्रदेश है, जहां इस तरह का एप्प लांच किया गया है।
डेंगू के बारे में समझें जरूरी बातें
जब डेंगू इतना डरावना होता जा रहा है तो आम आदमी को इसके बारे में जानने की जरूरत है, ताकि इसके डर को कम करने के साथ-साथ इस बीमारी का सही उपचार भी हो सके। आइये जानते हैं डेंगू के लक्षण, उपचार व सावधानियाँ:
कैसे होता है डेंगू
डेंगू एडीज इजिप्टी नस्ल की मादा मच्छर के काटने से होता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता। इनका आकार सामान्य मच्छरों से बड़ा होता है और ये साफ जगह पर रहते हैं। डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज को जब कोई एडीज मच्छर काटता है तो वह उस मरीज के खून के साथ डेंगू वायरस भी अपने शरीर में ले लेता है। जब यह डेंगू वायरस वाला मच्छर किसी और को काटता है तो उससे वह वायरस उस मनुष्य के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू से पीड़ित हो जाता है।
क्या हैं डेंगू के लक्षण व प्रकार?
मच्छर के काटने से करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण नजर आने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने की अवधि 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है।
डेंगू बुखार तीन प्रकार का होता है: क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार, डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)। इन तीनों में से दूसरी और तीसरी किस्म का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।
साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है और इससे जान का कोई खतरा नहीं होता लेकिन अगर किसी को DHF या DSS डेंगू बुखार हो और उसका फौरन उपचार शुरू न किया जाए तो जान भी जा सकती है।
साधारण डेंगू बुखार के लक्षण:
ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार होना, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है, बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मितलाना और मुंह का स्वाद खराब होना, गले में हल्का-सा दर्द होना, शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रेशे होना आदि।
यह करीब 5 से 7 दिन तक रहता है और मरीज ठीक हो जाता है। ज्यादातर मामलों में इसी किस्म का डेंगू बुखार होता है।
डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF) के लक्षण:
नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना, स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चिकत्ते पड़ जाना,
अगर क्लासिकल साधारण डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई दें तो वह डीएचएफ़ हो सकता है। खून के टेस्ट से इसका पता लग सकता है।
डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) के लक्षण:
इस बुखार में DHF के लक्षणों के साथ-साथ 'शॉक' की अवस्था के भी कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। मरीज बहुत बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद उसकी चमड़ी ठंडी महसूस होती है। मरीज धीरे-धीरे बेहोश होने लगता है। मरीज की नब्ज कभी तेज और कभी धीरे चलने लगती है। मरीज का ब्लड प्रेशर एकदम कम हो जाता है।
प्लेटलेट्स की भूमिका
आमतौर पर तंदुरुस्त आदमी के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं। अगर प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो उसकी वजह डेंगू हो सकता है। अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। डेंगू का वायरस आमतौर पर प्लेटलेट्स कम कर देता है, जिससे बॉडी में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। अगर प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं, मसलन सुबह एक लाख थे और दोपहर तक 50-60 हजार हो गए तो शाम तक गिरकर 20 हजार पर पहुंच सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर प्लेटलेट्स का इंतजाम करने लगते हैं ताकि जरूरत पड़ते ही मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाए जा सकें। प्लेटलेट्स निकालने में तीन-चार घंटे लगते हैं।
उपचार:
अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज घर पर किया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह लेकर पैरासिटामोल (क्रोसिन आदि) ले सकते हैं। एस्प्रिन (डिस्प्रिन आदि) बिल्कुल न लें। इनसे प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं। अगर बुखार 102 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा है तो मरीज के शरीर पर पानी की पट्टियां रखें। मरीज को आराम करने दें।
मरीज में DSS या DHF का एक भी लक्षण दिखाई दे तो उसे जल्दी-से-जल्दी किसी फिजीशियन डॉक्टर के पास ले जाएं। DSS और DHF बुखार में प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, जिससे शरीर के जरूरी हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। डेंगू बुखार के हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ डेंगू हैमरेजिक और डेंगू शॉक सिंड्रोम बुखार में ही जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती हैं। अगर सही समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो DSS और DHF का पूरा इलाज मुमकिन है।
किसी भी तरह के डेंगू में मरीज के शरीर में पानी की कमी नहीं आने देनी चाहिए। उसे खूब पानी और तरल पदार्थ (नीबू पानी, छाछ, नारियल पानी आदि) पिलाएं ताकि ब्लड गाढ़ा न हो और जमे नहीं। साथ ही, मरीज को पूरा आराम करना चाहिए। आराम भी डेंगू की दवा ही है।
सावधानियाँ:
अधिक ठंडा पानी न पीएं, मैदा और बासी खाना न खाएं। खाने में हल्दी, अजवाइन, अदरक, हींग का ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल करें। इस मौसम में पत्ते वाली सब्जियां, अरबी, फूलगोभी न खाएं। हल्का खाना खाएं, जो आसानी से पच सके। पूरी नींद लें, खूब पानी पीएं और पानी को उबालकर पीएं। मिर्च मसाले और तला हुआ खाना न खाएं, भूख से कम खाएं, पेट भर न खाएं। छाछ, नारियल पानी, नीबू पानी आदि खूब पिएं।
बचाव हेतु करें मच्छरों का कंट्रोल
घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करें। अगर पानी जमा होने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डालें। रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें। घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें। अगर रखें तो उलटा करके रखें।
डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें। अगर मुमकिन हो तो खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें। मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि इस्तेमाल करें। गुग्गुल के धुएं से मच्छर भगाना अच्छा देसी उपाय है।
जानकारी स्रोत: नवभारत टाइम्स व अन्य सूचनाएँ

Monday, June 12, 2017

रिटायरमेंट से पहले ही फरार हुए जस्टिस कर्णन

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : जस्टिस सीएस कर्णन सोमवार रिटायर हो रहे हैं, मगर वह अब भी फरार हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट के जज कर्णन 9 मई से भूमिगत हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को अवमानना का दोषी मानते हुए 6 महीने की सजा सुनाई थी। यह पहला मौका है, जब कोई जज अपनी फेयरवेल में शामिल नहीं होगा, अगर वह सामने भी आते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
जस्टिस कर्णन ने मद्रास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की बेंच ने इस सिलसिले में जस्टिस कर्णन की लिखी चि_ियों का स्वत संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मुकदमा शुरू किया था। इस सिलसिले में जस्टिस कर्णन 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। ऐसा करने वाले वह किसी हाई कोर्ट के पहले जज थे। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को अवमानना के मामले में दोषी करार देते हुए 6 महीने की सजा सुनाई थी। कोर्ट के इस आदेश के बाद ही जस्टिस कर्णन कोलकाता से अपने गृह प्रदेश तमिलनाडु आ गए थे। उनके पीछे अगले ही दिन पश्चिम बंगाल पुलिस की दो टीमें भी चेन्नई पहुंच गईं थी। तब से अब तक तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई ठिकानों में जाकर तलाश कर चुकी है, लेकिन जस्टिस कर्णन का कोई पता नहीं चल पाया है। 
हालांकि जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को असंवैधानिक बताया था। उन्होंने कहा था, 8 फरवरी से ये सात जज मुझे कोई भी न्यायिक और प्रशासनिक कार्य नहीं करने दे रहे हैं। इन लोगों ने मुझे परेशान कर दिया है और मेरा सामान्य जीवन खराब कर दिया है. इसलिए, मैं सभी सात न्यायाधीशों से मुआवजे के रूप में 14 करोड़ रुपये लूंगा।

Thursday, May 4, 2017

जारी है जजों की जंग: जस्टिस कर्णन ने SC के आदेश को बताया 'पागलपन'

मेडिकल टेस्ट से जस्टिस कर्णन का इनकार, SC के आदेश को बताया 'पागलपन'

उत्तम हिन्दू से साभार: 
कोलकाता (उत्तम हिन्दू न्यूज) : सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में आरोपी कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन ने गुरुवार को मेडिकल टेस्ट से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की बेंच के आदेश पर तीन सदस्यों की एक मेडिकल टीम सुबह न्यू टाउन एरिया स्थित जस्टिस कर्णन के घर पहुंची थी। इस दौरान कर्णन ने टीम को कहा कि वह पूरी तरह से ठीक हैं और उन्हें मेंटल टेस्ट की आवश्यकता नहीं है। 

मेडिकल टीम के पहुंचने से पहले जस्टिस कर्णन ने एक प्रेस ब्रिफिंग बुलाई। उन्होंने मेडिकल जांच को इलीगल बताते हुए कहा, कानून के अनुसार इस तरह की जांच में गार्जियन का सिग्नेचर जरूरी है. यह प्रक्रिया नहीं फॉलो की गई। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को 'पागल न्यायाधीशों का पागलपन भरा आदेश' करार देते हुए जांच कराने से इनकार किया है। मेरी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है और मैं इसे जारी रखूंगा।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय पीठ ने सोमवार को न्यायमूर्ति कर्णन के मानसिक स्वास्थ्य की जांच के लिए 4 मई को एक मेडिकल बोर्ड के गठन का निर्देश दिया था और 8 मई को जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा था। न्यायमूर्ति कर्णन ने अपने मानसिक स्वास्थ्य की जांच संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को 'हास्यास्पद' करार दिया था। न्यायमूर्ति कर्णन न्यायपालिका के अपमान और सर्वोच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अवमानना का सामना कर रहे हैं।

Wednesday, May 3, 2017

जजों के बीच जारी है जंग, एक दूसरे के खिलाफ जारी कर रहे हैं वारंट

जस्टिस कर्णन ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सहित सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों के खिलाफ जारी किया गैर-जमानती वारंट 

आखिर उस देश का क्या होगा, जहां के जज ही आपस में झगड़ने लगे हो! भारत में सर्वोच न्यायालय व कलकत्ता उच्च न्यायालय के जजों के कानूनी झगड़े ने तो न्यायपालिका को ही मज़ाक बना कर रख दिया है।
इस मामले में कोर्ट की कार्यवाही में अवमानना का सामना कर रहे कलकत्ता हाई कोर्ट के जज जस्टिस सी एस कर्णन ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस जे एस खेहर सहित सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है।

हाई कोर्ट में जाने से प्रतिबंधित चल रहे कर्णन ने कोलकाता के अपने घर से ही सुओ-मोटो न्यायिक आदेश जारी कर दिया। आदेश देते समय जस्टिस कर्णन ने कहा कि, 'यह आम जनता को भ्रष्टाचार और अस्थिरता से बचाने के लिए देश के हित में है।' उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को जस्टिस खेहर सहित 7 जजों के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने दिल्ली के डीजीपी या पुलिस कमिश्नर को इस आदेश का पालन करने का आदेश दिया।

उन्होंने CJI खेहर के अलावा जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष, जस्टिस कुरियन जोसेफ के खिलाफ यह गैर जमानती वॉरंट जारी किया। कर्णन ने इन सभी जजों को उनके समक्ष पेश होने को कहा था। मंगलवार को दिए आदेश में उन्होंने कहा कि ये सभी 'आरोपी' जज 'अनुपस्थित' रहे।

जस्टिस कर्णन का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों के द्वारा उनका मेडिकल परीक्षण कराए जाने के एक दिन बाद आया। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया था कि जस्टिस कर्णन की दिमागी जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए। हालांकि इसके बाद कर्णन ने भी सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों को AIIMS के मानसिक रोग से जुड़े बोर्ड के सामने पेश करने का आदेश दे दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस कर्णन पर अवमानना मामले में सुनवाई चल रही थी। जस्टिस कर्णन ने 20 जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज किया था।

'आप' के अंदर फिलहाल थमा बवाल, लेकिन पिक्चर अभी बाकी है- NBT

'आप' के अंदर फिलहाल थमा बवाल, लेकिन पिक्चर अभी बाकी है

नवभारतटाइम्स.कॉम, नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी ( आप) में पिछले तीन-चार दिनों से उठा बवंडर भले थमता हुआ दिख रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में मौजूद सूत्र ने बताया कि दो दिनों से बागी तेवर दिखा रहे कुमार विश्वास की मांगों के आगे जिस तरह से पार्टी ने घुटने टेके हैं उससे साफ हो गया है कि अरविंद केजरीवाल अब पार्टी में पहले की तरह 'अजेय' नहीं रह गए हैं। सूत्र का कहना था कि यह पार्टी के अंदर केजरीवाल के समानांतर एक और सत्ता केंद्र की शुरुआत है।


गौरतलब है कि दिल्ली में हाल में संपन्न नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार के बाद से ही पार्टी में अंदरखाने नेतृत्व पर सवाल उठाए जाने लगे थे। गुटों में बंटी आप के नेता एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते नजर आए। इसी क्रम में पार्टी के ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान ने कुमार विश्वास के खिलाफ खुलकर बयानबाजी करते हुए उन पर बीजेपी के साथ मिलकर पार्टी को तोड़ने की कोशिश करने आरोप लगाया था। इसके बाद कुमार विश्वास अमानतुल्लाह को पार्टी से निकालने की मांग पर अड़ गए थे।

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 Dr Kumar Vishvas ✔ @DrKumarVishwas
"यदि अंधकार से लड़ने का संकल्प कोई कर लेता है
तो एक अकेला जुगनू भी सब अन्धकार हर लेता है"🇮🇳
लड़ेंगे! जीतेंगे!
आभार! भारत माता की जय!
2:33 PM - 3 May 2017
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जब इशारों-इशारों में पार्टी आलाकमान ने संकेत दे दिया कि अमानतुल्लाह पर पीएसी से निकालने से ज्यादा कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी तो कुमार विश्वास ने मंगलवार शाम पांच बजे अपना ब्रह्मास्त्र चल दिया और सार्वजनिक रूप से कह दिया कि वह पार्टी छोड़ने के बारे में रात तक घोषणा कर सकते हैं।

इसके बाद देर रात तक कुमार विश्वास को मनाने का दौर चलता रहा। रात 11 बजे खुद सीएम अरविंद केजरीवाल और डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया गाजियाबाद के वसुंधरा में कुमार विश्वास के घर उन्हें मनाने पहुंचे। इस दौरान वहां काफी कार्यकर्ता थे और उन्होंने जमकर विश्वास के समर्थन में नारेबाजी की। सुबह पीएसी की मीटिंग शुरू होने से पहले भी कुमार विश्वास ने अपने तेवर बरकरार रखते हुए कहा कि वह अपने 'राष्ट्रवादी विडियो' वी द नेशन के लिए माफी नहीं मांगेगे भले ही संगठन, पार्टी, सरकार व व्यवस्था नाराज रहे। साफ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि वह पार्टी में मजबूत आंतरिक लोकतंत्र और जिन सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत है उनके खिलाफ कार्रवाई के पक्षधर हैं।


जिस तरह से पीएसी की बैठक में कुमार विश्वास की ज्यादातर बातें मान ली गई हैं उससे उनका पलड़ा भारी दिख भी रहा है। अमानतुल्लाह को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है और उन्हें मनीष सिसोदिया की जगह राजस्थान का प्रभारी बना दिया गया। सूत्र का कहना है कि अरविंद और उनके करीबियों के नेतृत्व में लगातार हार झेल रही आप मौजूदा स्थिति में विश्वास के सवालों की अनदेखी करने की स्थिति में नहीं है। सूत्र ने बताया कि पार्टी नेतृत्व को इसलिए भी झुकना पड़ा क्योंकि ज्यादातर विधायक और मंत्री भी विश्वास के सवालों के साथ खड़े दिख रहे हैं। अमानतुल्लाह के अलावा केवल मनीष सिसोदिया ही एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने विश्वास के खिलाफ खुलकर कुछ बोला है।

पार्टी के सूत्र का कहना है कि जिस तरह से सारे फैसले तीन-चार लोगों का गुट ले रहा है, उसको लेकर भारी असंतोष है और उसे कुमार विश्वास ने आवाज दी है। उनका यह भी कहना है कि पार्टी का झगड़ा खत्म नहीं है बल्कि आने वाले दिनों में आप के भीतर एक और सत्ता केंद्र देखने को मिल सकता है। या फिर यह भी हो सकता है कि आप में एक टूट दिखे।