Tuesday, June 18, 2013

शेयर मार्केट मई पैसा में लगाने से पहले ये आर्टिकल पूरा पढ़ ले



पूरा पता चल जाएगा की शेयर मार्केट में पैसा केसे डूबता है

एक बार एक आदमी ने गांववालों से कहा की वो 10 रु .में एक बन्दर खरीदेगा , ये सुनकर सभी गांववाले नजदीकी जंगल की और दौड़ पड़े और वहां से बन्दर पकड़ पकड़ कर 10 रु .में उस आदमी को बेचने लगे .......
कुछ दिन बाद ये सिलसिला कम हो गया और लोगों की इस बात में दिलचस्पी कम हो गयी .......

फिर उस आदमी ने कहा की वो एकएक बन्दर के लिए 20 रु .देगा, ये सुनकर लोग फिर बन्दर पकड़ने में लग गये , लेकिन कुछ दिन बाद मामला फिर ठंडा हो गया ....

अब उस आदमी ने कहा की वो बंदरों के लिए 50 रु . देगा,लेकिन क्यूंकि उसे शहर जाना था उसने इस काम के लिए एक असिस्टेंट नियुक्त कर दिया ........
50 रु .सुनकर गांव वाले बदहवास हो गए ,लेकिन पहले ही लगभग सारे बन्दर पकडे जा चुके थे इसलिए उन्हें कोई हाथ नही लगा ......

तब उस आदमी का असिस्टेंट उनसे आकर कहता है .....
" आप लोग चाहें तो सर के पिंजरे में से 35 -35 रु . में बन्दर खरीद सकते हैं , जब सर आ जाएँ तो 50 -50 में बेच दीजियेगा "...
गांव वालों को ये प्रस्ताव भा गया और उन्होंने सारे बन्दर 35 -35रु .में खरीद लिए .....

"अगले दिन न वहां कोई असिस्टेंट था और न ही कोई सर .......बस बन्दर ही बन्दर "

Monday, June 10, 2013

कुरुक्षेत्र में बारिस के आसार Weather forcast for Kurukshetra ....

Tonight Jun 10

Partly Cloudy
86°F
Partly Cloudy

Tue Jun 11

AM T-Storms
95°
85°
AM T-Storms

Wed Jun 12

Partly Cloudy
99°
79°
Partly Cloudy

Thu Jun 13

Scattered T-Storms
96°
78°
Scattered T-Storms

Fri Jun 14

Scattered T-Storms
98°
77°
Scattered T-Storms

                                             INDIA METEOROLOGICAL DEPARTMENT 
                              MULTIMODEL ENSEMBLE BASED DISTRICT LEVEL WEATHER FORECAST   
                                               ISSUED ON:  10-06-2013
                                        VALID TILL 08:30 IST  OF THE NEXT 5 DAYS

 DISTRICT :  KURUKSHETRA                                                    STATE :  HARYANA          
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    PARAMETERS                                            ENSEMBLE FCST   
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                              DAY-1               DAY-2               DAY-3               DAY-4               DAY-5
                              11/06               12/06               13/06               14/06               15/06
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Rainfall (mm)                   0                   0                  10                  27                  25
Max Temperature ( deg C)       48                  48                  44                  32                  31
Min Temperature ( deg C)       35                  35                  31                  27                  26
Total cloud cover (octa)        1                   2                   5                   7                   8
Max Relative Humidity (%)      33                  50                  67                  82                  79
Min Relative Humidity (%)      11                  13                  30                  66                  64
Wind speed (kmph)             007                 017                 021                 012                 006
Wind direction (deg)          305                 139                 124                 112                 133
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 NOTE: -99.0 ........ NO DATA 

संत और नेता मिलकर सत्संग करते,कष्ट हरते.........वधावन



 नेताओं का सानिध्य पाने वाले प्रचारकों को भी है मीडिया में बने रहने चस्का
सुरेंद्र पाल वधावन
आजकल किसी प्रचारक के सत्संग या समारोह का आयोजन हो और उसमें किसी नेता का आगमन न हो तो समझो सत्संग अधूरा है। नेताओं का सानिध्य पाने वाले इन प्रचारकों को नेताओं की तरह ही मीडिया में बने रहने का अच्छा खासा चस्का भी है। कार्यकम को लाईव दिखाने पर ही मोटा रुपया किसी चैनल को दिया जाता है। कुछ एक प्रवारक तो नेताओं के अलावा  फिल्मी हस्तियों को भी अपने समागम में बुलाकर अक्सर अपनी बल्ले-बल्ले करवाते रहते हैं। वास्तव में समय के बदलाव के साथ-साथ और आधुनिक तकनीक और जीवनशैली ने संत समाज के स्वरुप को बदल दिया है।
 आज के ज्यादातर प्रचारक सादगी से दूर हो रहे हैं और  पूर्णतया भौतिकवादी संस्कृति को आत्मसात कर चुके हैं। यह संत देश विदेश में समागम करते हैं जिन पर श्रद्धालुओं के लाखों रुपए खर्च होते हैं। इसके अलावा स्वंय को प्रचारित करने लिए उक्त श्रेणी के धनाढय संत महंगे  टी.वी चेनलों का सहारा लेते है। आमजन को अंत:मुखी बनने का उपदेश देने वाले यह संत स्वंय भौतिकवाद का बुरी तरह से शिकार हैं।
 किसी भी नगर में प्रवचन कार्यक्रम रखने से पहले संतों के बड़े बड़े कटाउट उसकी प्रमुख सडक़ों और स्थानों पर लगाए जाते हैं। आयोजकों द्वारा  स्वागत द्वार सजाए जाते हैं और सडक़ों पर बिजली की लडिय़ां और फानूस लगाए-जगाए जातें हैं। बिजली की सप्लाई निर्विघ्र रखने के लिए जनरेटर उपलब्ध किए जाते हैं। जो लोग समागम में नहीं आते उन्हें संत जी की वाणी श्रवण कराने के लिए आयोजकगण हाई वॉटेज के स्पीकरों का इस्तेमाल करते हैं।  संतो के ठहरने की व्यवस्था आजकल किसी $गरीब की झोंपड़ी में नहीं होती और न ही संत कभी-भिक्षाम देह शब्द का उच्चारण करते भिक्षा मांगते हैं। संतो को भोज देने के लिए अमीर श्रद्वालुओं की कतार लगी रहती है। पंद्रह प्रकार के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। समारोह स्थल के बाहर आर्युवेदिक दवाओं धार्मिक पुस्तकों चित्रों के स्टाल आकर्षण का केंद्र होते हैं। इन स्टालों पर पौरुष शक्ति बढ़़ाने की मूल्यवान दवाएं भी उपलब्घ रहती हैं। समागम में पंडाल के भरने की सूचना मोबाइल पर संत जी के प्रमुख चेले को मिलती है तो संतजी को एक लग्जरी वाहन में  प्रवचन स्थल पर लाया जाता है।
--सुरेंद्रपाल वधावन----3297/21डी चंडीगढ़ 0172-2773297-094168-72577

Saturday, June 8, 2013

गुरु अर्जुनदेव जी शहीदी पर्व पर विशेष....वधावन





अनेक भाषाओं में लहलहाई है गुरु अर्जुनदेव की वाणी
श्री आदिग्रंथ का संपादन किया ,सुखमणि आपकी सर्वोत्कृष्ट रचना है
 शाहाबाद मारकंडा -सुरेंद्रपाल वधावन

श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संकलनकर्ता पांचवें गुरु अर्जुनदेव की वाणी भारत की एक ऐसी अमूल्य धरोवर है जो हमारी संस्कृति,वैश्विक चेतना तथा जीव मात्र के प्रति हमारी प्रीति और सदाशयता की साक्षी है। सुकरात की भांति सच्चाई पर प्राण न्यौछावर करने वाले तथा संगीत को संत भाषा देने वाले गुरु अर्जुनदेव का स्थान दस सिक्ख गुरुओं में अपने ढंग का एक अलग स्थान है। पंचम पातशाह गुरु अर्जुनदेव जी का गुरुगद्दी काल 1581-1606 तक रहा। आप गुरु राम दास जी और बीबी भाणी जी के छोटे पुत्र थे। गुरु  अर्जुन देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1563 में गोइंदवाल साहिब में हुआ था।गुरु जी बाल्यकाल से ही अत्यंत तेजस्वी थे। 4 वर्ष की आयु में आपने रागों पर आधारित गुरुबाणी का गायन आरंभ कर दिया था। 11 वर्ष की आयु में आप अनेक भाषाओं और  राग-रागणियों के मर्मी कलावंत बन चुके थे। 1579 में आपका विवाह जालंधर के माउ गांव के कृष्ण चंद की सपुत्री माता गंगा जी के साथ हुआ।  आपके गायन में एक आलौकिक कशिश थी। 1579 में आपका विवाह जालंधर के माउ गांव के कृष्ण चंद की सपुत्री माता गंगा जी के साथ हुआ। गुरु अर्जुन देव जी के नाना तीसरे गुरु अमरदास जी गुरुजी की विद्वत्ता के इतने कायल थे कि उन्हें वाणी का बोहिथ यानी के वाणी का जहाज मानते थे।
 गुरु अर्जुन देव जी ने केवल 43श्वर्ष की आयु पाई थी लेकिन आपके कार्यों को वक्त की चौखट में रख कर देखा जाये तो आश्चर्य होता है। कुल 15 वर्षों ने आपने इतने कार्य किए जिनके लिए कई पीढिय़ां लग जाएं तो भी काम पूरा न हो। गुरु अर्जुन देव की वाणी कई भाषाओं में लहलहाई है। सुखमणि आपकी सर्वोत्कृष्ट रचना है जिसके उपर ब्रजभाषा का गहरा रंग है । कुछ रचनाओं में संस्कृत और प्राकृत  का गहरी पुट है तो अन्य में $फारसी और लेंहदी का प्रभाव देखने को मिलता है। गुरुजी की रचनाओं का एक बड़ा भाग पंजाबी के रंग में रंगा है लेकिन यह पंजाबी ऐसी है कि जो पंजाब क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसमें अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों को उदारतापूर्वक शामिल किया गया हे।वास्तव में उन्होंने पंजाबी को एक संत भाषा में ढाल देने का कार्य किया है।आपने श्री आदिग्रंथ की रचना की। आपने पहले के चार गुरुओं तािा समकालीन संतों की वाणी का प्रामाणिक पाठ पूछ-पूछ कर तैयार किया जिनमें लगभग 15हज़ार से अधिक बंद और 3 हज़ार के लगभग सबद शामिल हैं। इन रचनाओं को संग्रहीत और संकलित कर आपने श्री आदिग्रंथ की रचना की।  श्री आदि ग्रंथ में पांच गुरु साहिबान की वाणी के साथ-साथ 30 भगतों,भटों व सिखों की वाणी संग्रहीत की गई। इसमें बाद में दशम गुरु गोबिंद सिंह जी ने नौंवे गुरु ते$गबहादूर की वाणी भी शामिल की। श्री आदि ग्रंथ साहिब में कुल 5894 शबद हैं जिनमें से 2218शबदों के रचयिता स्वयं पंचम पातशाह हँ। गुरु ग्रंथ साहिब जी में 305 अष्टपदियां,145 छंद,22 वारें,471 पउड़ी संग्रहीत हैं।  समस्त वाणी गायन के लिये है जिसे 31 रागों में गायन करने का विधान है। इसमें प्रमुख विशेषता यह कि शबद का गायन किस रा$ग में किया जाये उस का उल्लेख भी साथ किया गया है। इस महान ग्रंथ में पृष्ठ संख्या 1430 है। इस पवित्र ग्रंथ का संपादन करने में गुरु अर्जुन देव जी को तीन वर्ष का समय लगा।गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश श्री हरिमंदिर साहिब में 16 अगस्त 1604 में किया गया था।
पंचम पातशाह ने 3 अक्तूबर 1588 में मुस्लिम पीर साईं मियां मीरजी से श्री हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास करवाया। आपने 1590 में तरनतारन के सरोवर का निर्माण, 1594 में करतारपुर में थम्मसाहिब गुरुद्वारा ,1596 में तरनतारन,1597 में छेहरटा साहिब,1597 में ही श्री हरगोबिंदपुरा,1599 में लाहौर में बाऊली साहिब,और 1602-03 में अमृतसर में अनेक निर्माण कार्य संपन्न कराये। मुगल सम्राट जहांगीर गुरु अर्जुन देव जी के बढ़ते  प्रभाव और लोकप्रियता के कारण उनसे द्वेष भाव रखने लगा था। कश्मीर जाते समय उसने गुरुजी को लाहौर में मिलने को कहा और यह $फरमान दिया कि गुरु जी श्री आदि ग्रंथ में इस्लाम धर्म के प्रवत्र्तक मोहम्मद साहिब की स्तुति में लिखें और इस्लाम धर्म अपना लें। गुरुजी के इंकार करने पर का$जी ने फतवा दिया कि गुरुजी को कष्टदायक मृत्यु की स$जा दी जाये। पांच दिन तक गुरु साहिब को खेोलते हुये पानी के  बड़े कड़ाहे में रख कर उपर से गर्म रेत डाली जाती रही लेकिन गुरुजी सहज और शांतिपूर्वक सब यातनाएं झेलते रहे पांच दिन के पश्चात राग रागणियों के मर्मी कलावंत और वाणी के बोहिथ इस महान गुरु ने अविचल भाव से - तेरा मीठा-मीठना लागे। हरिनाम पदार्थ नानक मांगे।।  गाते प्राण त्याग दिए।


प्रस्तुति -सुरेंद्रपाल वधावन----3297/21डी चंडीगढ़ 0172-2773297-094168-72577

Tuesday, June 4, 2013

बचपन की वे चुडैलें ...Ranjana Jaiswal

                                                                                                                           रंजना जैसवाल

बचपन के गाँव में अक्सर औरतों को चुड़ैल पकड लेती थी |वह भी अक्सर तब जब वे शौच के लिए रात-विरात बसवाड़ी की तरफ जाती थीं |फिर वे घर आकर खेलने लगती थीं |उछल-उछलकर गिरतीं |गालियाँ बकती |बड़े-छोटे का कोई लिहाज ना करतीं |अपने ऊपर ढाएं गए जुल्मों को गिनातीं |बहू होने पर भी लंबे बाल खोलकर नंगे सिर बैठ जातीं |फिर सोखा आता |हट्टे-कट्ठे सोखा की मार से चुडैलें त्राहि-त्राहि करती भाग खड़ी होती |मुझे इस दृश्य से बड़ा डर लगता |सोचती -आखिर औरतों को ही क्यों चुडैलें पकडती हैं ,मर्दों को क्यों नहीं और सोखा मर्द ही क्यों होता है ,औरत क्यों नहीं ?वह तो बहुत बाद में मेरे गुरू ने बताया कि चुड़ैल वगैरह कुछ नहीं होती |दरअसल गाँव की कुछ औरतों की अतृप्त इच्छाएँ व दमित स्वतंत्रता ही चुड़ैल बन जाती हैं |दिन भर सात हाथ के घूँघट में बंधुआ मजदूर बनी औरतें जब सुबह-शाम शौच जाने के बहाने थोड़ी देर के लिए आजाद होतीं हैं ,तो उस समय उनकी दमित इच्छाएँ खुली हवा में सांस लेतीं हैं |वे खुली हवा में उड़ जाना चाहतीं हैं ,पर अपने दमित जीवन की विवशता और बंधनों को सोचकर उदास हो जातीं हैं |वे सोचतीं हैं -आखिर क्यों वे अन्याय-अत्याचार सहकर भी चुप रहने को विवश हैं |अपनी वस्तुस्थिति का ज्ञान उनमें बदले की भावना भर देता है |परिणाम यह होता कि घर पहुँचते-पहुँचते उन्हें चुड़ैल पकड़ चुकी होती है |फिर वे कभी हंसतीं-कभी विलाप करतीं हैं और हाथ पैर पटकतीं हैं |दरअसल वे अपने मनुष्य समझे जाने के लिए चीत्कार करतीं हैं | सामान्य रहने पर वे अपनी व्यथा किसी से नहीं कह सकतीं,तो चुड़ैल के बहाने अपनी भडास निकाल लेती हैं |
पर जिस तरह दमित -गुलाम स्त्रियों की ईजाद चुडैलें होती हैं ,उसी तरह मर्दों की ईजाद 'सोखा 'होता है |मर्द समाज जानता था कि स्त्रियों पर सवार चुडैलें उनके घर की इज्जत का तमाशा बना सकती हैं |घर की भीतरी कालिख सबके सामने उसके मुख पर मल सकती हैं ,आजाद हो सकती हैं |इसलिए उनको नियंत्रण में रखने के लिए सोखा पालता था |स्त्री सोखा को शायद चुड़ैलों से अपनापा हो जाता ,इसलिए मर्द ही सोखा होते |सोखा कोई काम नहीं करता था पर पूरा गाँव अपनी फसल का कुछ हिस्सा सोखा को देता |इस तरह स्त्रियाँ डाल-डाल थीं तो मर्द पात-पात |आज बहुत कुछ बदला है पर कितना ?
-एक नाराज औरत की डायरी
Like · · · May 31 at 8:26pm ·