Monday, January 16, 2012

मुख्यमंत्री बताएं पिछले सात वर्षों में कौन सी नई परियोजना की गई शुरू : अशोक अरोड़ा



डी-प्लान की राशि में बंदरबांट का आरोप लगाया इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने
कुरुक्षेत्र/पवन सोंटी 

इनैलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर क्षेत्रवाद का आरोप लगाते हुए चुनौती दी कि मुख्यमंत्री बताएं कि पिछले सात वर्षों में कुरुक्षेत्र में सरकार ने विकास की कौन सी नई परियोजना शुरू की है? उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में कांग्रेस के तीन-तीन सांसद हैं, एक मंत्री है, लेकिन ऐसा लगता है कि इस जिले के लिए कांग्रेस की सरकार नहीं है क्योंकि कुरुक्षेत्र में विकास के नाम पर एक भी ईंट नहीं लगाई जा रही। अरोड़ा जिला इनेलो कार्यालय में पार्टी के हल्का कार्यकत्र्ताओं की बैठक के पश्चात पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। अरोड़ा तथा इनेलो के अनेक नेताओं ने नवनियुक्त जिला प्रधान रामकुमार कश्यप का फूल-माला डालकर स्वागत किया तथा उनकी नियुक्ति पर इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला का आभार व्यक्त किया। नवनियुक्त जिला प्रधान रामकुमार कश्यप ने अपनी नियुक्ति पर इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला, प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा, प्रधान महासचिव अजय चौटाला तथा इनेलो विधायक दल के उपनेता शेर ङ्क्षसह बड़शामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे जैसे गरीब व पिछड़े वर्ग के कार्यकत्र्ता को यह जिम्मेवारी सौंपकर चौटाला साहब ने जो विश्वास व्यक्त किया है, वे उस पर खरा उतरेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी में नए लोगों को जोड़ा जाएगा और जो कार्यकत्र्ता अच्छा काम करेंगे, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ब्राह्मण नेता राजकुमार शर्मा उर्फ काला ने अपने साथियों सहित इनेलो में शामिल होने की घोषणा की। अशोक अरोड़ा तथा अन्य इनेलो नेताओं ने राजकुमार शर्मा का पार्टी में शामिल होने पर स्वागत करते हुए कहा कि इन्हें पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा।  कार्यकत्र्ताओं की बैठक में प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने नव वर्ष का पार्टी का कैलेंडर भी जारी किया। अरोड़ा ने कहा कि कार्यकत्र्ताओं की बैठक में प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने कहा कि लाडवा में जिस प्रकार से दिन-दिहाड़े व्यापारी के घर पर लूटपाट की गई, यह घटना अपने आप में बड़ी ही चिंताजनक है। इसके अतिरिक्त बैठक में खाद की कृत्रिम कमी पर भी चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने कहा कि पहले किसान को फसल का भाव नहीं मिला और अब खाद कालाबाजारी में खरीदनी पड़ रही है। किसानों को खाद के साथ जबरदस्ती कीटनाशक दवाई का डिब्बा खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश पूरी तरह बर्बादी की कगार पर है। कार्यकत्र्ता बैठक में पंजाब में कांग्रेस को हराने के लिए पार्टी कार्यकत्र्ताओं की अकाली दल उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए ड्यूटियां भी लगाई गईं। इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मायाराम, जेएस चीमा, अशोक भारद्वाज, ईश्वर पूजम, ओम प्रकाश हथीरा, जिप सदस्य चंद्रभान वाल्मीकि, जिला प्रवक्ता रामपाल शर्मा, जीत सिंह शेर, जीताराम पाल, ईश्वर फतुहपुरिया, सुनील राणा, मोहन लाल अरोड़ा सहित अनेक इनेलो नेता उपस्थित थे।
डी-प्लान की राशि में की गई बंदरबांट
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने आरोप लगाया कि जिला के लिए आबंटित डी-प्लान की धनराशि में बंदरबांट की गई है। शाहाबाद तथा पिहोवा क्षेत्र को पांच-पांच करोड़ रुपए की राशि दी गई जबकि अधिक राशि थानेसर व लाडवा हल्के के लिए दी जानी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि डी-प्लान कमेटी की बैठक 4 तथा 9 जनवरी को स्थगित करने के पश्चात 10 जनवरी को निर्धारित की गई क्योंकि उस दिन वे बाहर थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने डी-प्लान राशि से विकास कार्य करवाने के लिए कहा तो जिला अधिकारियों ने उन्हें सॉरी कहते हुए कहा कि उनके ऊपर भारी दबाव है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर परिषद को बाढ़ प्रभावित एरिया में विकास के लिए मिली साढ़े चार करोड़ रुपए की अनुदान राशि कांग्रेसियों की वजह से वापस चली गई थी, लेकिन वह अपने प्रयासों से इस राशि को वापिस लाए और अब इस राशि से नगर में विकास कार्य हो रहे हैं।
मेला क्षेत्र में किए जा रहे हैं अवैध नक्शे पास
अरोड़ा ने आरोप लगाया कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा निर्धारित मेला क्षेत्र में निर्माण पर रोक है लेकिन मिलीभगत से इस मेला क्षेत्र में कालोनी काट दी गई हैं। इतना ही नहीं अवैध रूप से भवन निर्माण के नक्शे भी पास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की बैठक में उन्होंने थीम पार्क बनाने व पानी की निकासी के लिए बने एक गंदे नाले को ढकने की आवाज उठाई थी, लेकिन इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
कुरुक्षेत्र एकमात्र जिला जहां नहीं है राजकीय कालेज
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि कुरुक्षेत्र हरियाणा का एकमात्र जिला है जहां कोई भी राजकीय कालेज नहीं है। उन्होंने यह मांग कई बार उठाई लेकिन उनकी इस मांग को यह कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया कि कुरुक्षेत्र में पहले ही विश्वविद्यालय है।

Saturday, January 14, 2012

आश्वासनों पर खरी नहीं उतरी सरकार : बडशामी


आश्वासनों पर खरी नहीं उतरी सरकार : बडशामी
किसानों को मिलें आलू की फसल पर उचित मुआवजा 

बाबैन/सुरेश कुमार
भारतीय संविधान एवं संसदीय नियमों के अनुसार एक विधायक को जो आवाज उठानी चाहिए मैंने सदैव अपने अधिकारों के अनुसार अपने क्षेत्र से जुडी हर समस्या को विधानसभा में उठाने का काम किया है। शाहाबाद लाडवा सडक के बारे में हर अधिवेशन में आवाज उठाई व जल्द निर्माण के लिए सरकार से पूरा वाद-विवाद किया। उपरोक्त शब्द लाडवा हल्का के विधायक शेर सिंह बडशामी ने बाबैन में कार्यकत्र्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री व संबधित विभाग के मंत्री ने इस सडक को पूरा करने के कई आश्वासन दिए और अंत में लिखित रूप से 31 दिसम्बर को पूरा करने का आश्वासन दिया लेकिन सरकार दिए गए आश्वासन पर खरी नहीं उतरी जिससे लेकर कार्यकत्र्ताओं की बुलाई बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव से लिखित रूप में इस सडक को बनवाने की मांग एकत्रित की जाएगी व आलू पैदा करने के क्षेत्र में अग्रणी लाडवा हल्का के किसानों का आलू की फसल का लागत मूल्य भी पूरा नहीं हुआ, जिससे किसान बर्बादी के कगार पर है। कपास व बाजरा पैदा करने वाले किसानों की तरह आलू पैदा करने वाले किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

धर्मनगरी समाचार- विकलांग विद्यार्थियों को मिलेगी कुवि के हॉस्टल में मुफ्त रहने की सुविधा


विकलांग विद्यार्थियों को मिलेगी कुवि के हॉस्टल में मुफ्त रहने की सुविधा
कुरुक्षेत्र/पवन सोंटी 

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में इससे सम्बंद्धित कॉलेजों में पढऩे वाले 80 प्रतिशत एवं इससे अधिक शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों को मुफ्त होस्टल में रहने की सुविधा प्रदान की जाएगी। कुवि में पढऩे वाले विकलांग बच्चों के लिए यह सुविधा प्रदान करना एक अच्छा निर्णय है। विश्वविद्यालय के कुलपति लै. जनरल डा. डीडीएस संधू ने बताया कि विश्वविद्यालय में पढऩे वाले 80 प्रतिशत या इससे अधिक शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों को, जिनके परिवार की वार्षिक आय एक लाख रूपए से कम है, को एक हजार रूपए प्रतिमाह के हिसाब से स्कालरशिप भी प्रदान किया जाता है।  इस प्रकार की छात्रवृति प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय में राधा कृष्णन फाउंनडेशन फंड स्थापित किया गया है। इससे पहले मुफ्त होस्टल में रहने की सुविधा केवल नेत्रहीन विद्यार्थियों को प्रदान की जाती थी लेकिन  कुलपति ने अब इस सुविधा को विश्वविद्यालय में पढऩे वाले सभी 80 प्रतिशत या इससे अधिक विकलांग बच्चों के लिए भी देने का निर्णय लिया है।

दिल्ली में आयोजित 15वें विश्व संस्कृत सम्मेलन में प्रो. श्रीकृष्ण व प्रो. अरूणा ने किए शोध पत्र प्रस्तुत
कुरुक्षेत्र/पवन सोंटी
दिल्ली के विज्ञान भवन में 5  से 10 जनवरी तक राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान,दिल्ली और इंटरनेशनल एसोएिशन ऑफ संस्कृत स्टडीज द्वारा सयुंक्त रूप से आयोजित 15वें विश्व संस्कृत सम्मेलन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं प्राच्य विद्या संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. श्रीकृष्ण शर्मा व संस्कृत विभाग की अध्यक्षा प्रो. अरूणा शर्मा ने अपने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री डा.मनमोहन ङ्क्षसह ने यिा था। प्रो. श्रीकृष्ण शर्मा ने सम्मेलन के एक विशिष्ट पैनल में संस्थान द्वारा स्वीकृत महाभारतपदानुक्रमकोष के निर्माण की प्रविधि पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने पन्द्रह खंडों और लगभग 7000 पृष्ठों में प्रकाशित होने वाले इस कोष के निर्माण की प्रक्रिया को दृश्य एवं श्रव्य माध्यम से विद्वानों के सामने प्रस्तुत किया। इस पैनल में भाग लेने वाले अधिकाशं प्रतिभागी स्काटलैण्ड,जर्मनी और अमेरिका आदि देशों से आए हुए थे। भारतीय विद्वानों में प्रो. रामकरण शर्मा दिल्ली, प्रो. सरोजा भाटे, पूना, प्रो.एस.पी.नारंग पांडिचेरी, प्रो. विजय रानी कुरुक्षेत्र आदि प्रमुख थे जबकि 30 विद्वान विदेशी थे। इन सभी विद्वानों ने इस प्रोजेक्ट की प्रशंसा करते हुए इस महान उपक्रम के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को बधाई दी। प्रो. अरूणा शर्मा ने प्रख्यात नाट्यशास्त्री आचार्य मातृगुप्त के अनुपलब्ध नाट्यशास्त्र के प्रकीर्ण उद्धरण खंडों का अनुशीलन करके मातृगुप्त के नाटयशास्त्रीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह सिद्ध किया कि आज से लगभग 1500 वर्ष पूर्व मातृगुप्त ने एक सर्वागपूर्ण नाट्यशास्त्र की रचना की थी जिसमें रंगमंच से सम्बंद्धित सूक्ष्म विवेचन किया गया था। श्रोता विद्वानों ने शोध पत्र की प्रशंसा करते हुए इन उद्घरण खंडों के आधार पर मातृगुप्त के अनुपलब्ध नाटयशास्त्र की रूपरेखा को प्रकािशत करने का अनुरोध किया। उल्लेखनीय है कि इस विश्व संस्कृत सम्मेलन में भारत के 1200 विद्वानों के अतिरिक्त अन्य 32 देशों के 300 विद्वानों ने संस्कृत की 18 अलग अलग विधाओं पर शोधपत्र प्रस्तुत करके चर्चा परिचर्चा में भाग लिया। भारत में विश्व संस्कृत सम्मेलन 15  वर्षो के बाद आयोजित हुआ है। प्रोफेसर शर्मा दम्पती ने सम्मेलन में सहभागिता के निमित आर्थिक संसाधन जुटाने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति लै. जनरल डा. डीडीएस संधू तथा कुलसचिव डा. सुरेन्द्र देसवाल के प्रति आभार प्रकट किया।

चोर गिरोह से क्वाइलें खरीदने वाला काबू, रिमांड पर भेजा
कुरुक्षेत्र/पवन सोंटी
पुलिस ने ट्रांसफार्मर चोर गिरोह से तांम्बे की क्वाइलें खरीद करने वाला दुकानदार  ओमप्रकाश झांसा बस अड्डा से गिरफ्तार तथा दोषी के कब्जा से लगभग 188 किलोग्राम तांबे की क्वाइल बरामद की। इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक श्रीमती पारुल कुश ने बताया कि 28 दिसम्बर, 2011 को ट्रासर्फामर चोर गिरोह के मुखिया राजविन्द्र ङ्क्षसह को उसके तीन साथियों बलबीर, बलिहार व सिकंदर सहित गिरफ्तार किया गया था तथा दोषियों से पुलिस रिमाण्ड के दौरान पूछताछ जारी है। पूछताछ पर राजविन्द्र ङ्क्षसह ने बताया कि वह ट्रासर्फामरों से चोरी का माल तांबा तार क्वाइलें शिव बर्तन भण्डार के मालिक ओम प्रकाश  निवासी गांव झांसा को बेचते थे। तफ्तीश के दौरान अपराध शाखा से उप निरीक्षक जगबीर की पुलिस टीम ने झांसा बस अड्डा से ओम प्रकाश निवासी गांव झांसा को धर दबोचा। पूछताछ पर ओम प्रकाश ने माना कि उसने राजविन्द्र व उसके साथियों से ट्रांसफार्मरों से चोरी तांबा तार खरीद की है और अरोपी ओम प्रकाश के कब्जा से लगभग 188 किलोग्राम तांबा तार  बरामद की। दोषी ओम प्रकाश को बाद गिरफ्तारी माननीय न्यायालय में पेश किया। माननीय न्यायालय ने अरोपी ओम प्रकाश को एक दिन के पुलिस रिमाण्ड पर भेज दिया है।

Friday, January 13, 2012

समूचे भारत का धार्मिक पर्व है मकर सक्रांति ......

कुरुक्षेत्र/ पवन सोंटी
मकर सक्रांति पर्व सूर्य का धनु राशि छोड़ कर मकर में प्रवेश करना पर मनाया जाता है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार मकर संक्रांति एक भौगोलिक घटना है। इस दिन सूर्य जब धनु राशि से मकर राशि में आते हैं तो इन दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति को जहां एक किसानी का त्यौहार के रूप में मनाया जाता है वहीं भारतीय संस्कृति में एक शुभ चरण की शुरुआत के रूप में माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार मध्य दिसंबर के आसपास अशुभ चरण की समाप्ति पर शुभ् चरण की शुरू होती है। दूसरी ओर संक्रांति सर्दियों के मौसम की समाप्ति और एक नई फसल या बसंत के मौसम की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्यौहार पूरे भारत देश में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। देश के विभिन्न भागों में इसे अलग-अलग नामों और अनुष्ठान के साथ मनाया जाता है। 

वैज्ञानिकों के अनुसार सर्दियों संक्रांति के दिन की अवधि के क्रमिक वृद्धि की शुरुआत होती है। वैज्ञानिक वर्ष के कम से कम दिन 21-22 दिसंबर के आसपास है जिसके बाद दिन बढऩे शुरू होते हैं। इसलिए वास्तविक शीतकालीन संक्रांति 21 दिसंबर या 22 दिसंबर जब उष्णकटिबंधीय रवि मकर राशि में प्रवेश करती है पर शुरू होती है। इसलिए वास्तविक उत्तरायण 21 दिसंबर को होता है। यही मकर सक्रांति की वास्तविक तारीख भी थी। एक हजार साल पहले मकर संक्रांति 31 दिसंबर को मनाया गया था और अब 14 जनवरी को है। वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार पांच हजार साल बाद, यह फरवरी के अंत तक हो सकता है, जबकि 9000 के वर्षों में यह जून में आ जाएगा।
खैर इन सबके साथ हमें धार्मिक पहलु पर भी चिंतन करना चाहिये क्योंकि विज्ञान की बजाय आज भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मनुष्य ज्यादा चलते हैं। धार्मिक ग्रंथों में सूर्य को हिंदू धर्म में देवता का दर्जा दिया गया हैं, क्योंकि इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त करने के लिए सूर्य की उपासना करना हर मनुष्य के लिए नितांत जरूरी बताया गया है। सूर्य की सभी संक्रांतियों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मकर संक्रांति का गुणगान इसीलिए हमारे धर्मग्रंथों में किया गया है, जिससे आम जनमानस भगवान सूर्य की आराधना करके अपने जीवन का लक्ष्य हासिल कर सके।
इस वर्ष 14 जनवरी की अर्धरात्रि में सूर्य भगवान देवताओं के गुरु बृहस्पति की राशि धनु छोड़ कर शनि की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। इसलिए संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को ही माना गया है। धर्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के आते ही देवताओं की रात समाप्त हो जाती है, दक्षिणायन समाप्त होता है और देवताओं के दिन शुरू हो जाते हैं, उत्तरायण  शुरू हो जाता हैं। उत्तरायण में सूर्य का गोचर मकर, कुंभ, मीन, मेष, वृष और मिथुन राशि में होता है अर्थात दिन बड़े होते जाते हैं। दक्षिणायन में सूर्य का गोचर कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक और धनु राशि में होता है और रात बड़ी होती जाती है।  इस दिन से ही लोग मलमास के कारण रुके हुए अपने शुभ कार्य-गृहनिर्माण, गृहप्रवेश, विवाह आदि भी शुरू कर देते हैं। मलमास, बृहस्पति की राशियों - धनु और मीन में सूर्य भगवान के प्रवेश करने पर शुरू होता है। मान्यता है कि तब सूर्य भगवान देवगुरु बृहस्पति के साथ आध्यात्मिक ज्ञान की चर्चा में मग्न रहते हैं।  इसीलिए भोग-विलास आदि सांसारिक कार्यों से दूर होते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता में कहा है कि उत्तरायण के 6 माह में मरे हुए योगीजन ब्रह्म को ही प्राप्त होते हैं और दक्षिणायन में मृत्यु मिलने वाले स्वर्ग में अपने शुभ कर्मों का फल भोग कर वापस लौट आते हैं। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश जहां उनके अपने पुत्र शनि के साथ रहने का प्रतीक है, वहीं प्राणों को हरने वाली शीत ऋतु के प्रकोप को कम करने का संकेत है। जाहिर है, इस मौसम में पिता की सेवा पुत्र या संतान के हाथों होना ईश्वर कृपा प्राप्त होने का संकेत भी है। इसीलिए इसे सौभाग्य काल की संज्ञा भी दी जाती है।
माना जाता है कि उत्तरायण में देवता मनुष्य द्वारा किए गए हवन, यज्ञ आदि को शीघ्रता से ग्रहण करते हैं। मकर संक्रांति माघ माह में आती हैै। संस्कृत में मघ शब्द से माघ निकला है। मघ शब्द का अर्थ होता है-धन, सोना-चांदी, कपड़ा, आभूषण आदि। स्पष्ट है कि इन वस्तुओं के दान आदि के लिए ही माघ माह उपयुक्त है। इसीलिए इसे माघी संक्रांति भी कहा जाता है।
दक्षिण भारत में दूध और चावल की खीर तैयार कर पोंगल मनाया जाता है तो संक्रांति के एक दिन पूर्व पंजाब में लोहड़ी मनाई जाती है। लोग घर-घर जाकर लकडिय़ां इक_ा करते हैं और फिर लकडिय़ों के समूह को आग के हवाले कर मकई की खील, तिल व रवेडिय़ों को अग्न देव को अर्पित कर सबको प्रसाद के रूप में अर्पित करते हैं। इसे खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है, क्योंकि इन दिनों में खिचड़ी खाई भी जाती है और दान में भी दी जाती है। देसी घी, खिचड़ी में डाल कर खाने का प्रचलन उत्तर प्रदेश व बिहार में इसी संक्रांति से शुरू होता है। महाराष्ट्र और गुजरात में मकर संक्रांति के दिन लोग अपने घर के सामने रंगोली अवश्य रचते हैं। फिर एक-दूसरे को तिल-गुड़ खिलाते हैं। साथ ही कहते हैं- तिल और गुड़ खाओ और फिर मीठा-मीठा बोलो। इस दिन असम में माघ बिहु या भोगाली बिहु के रूप में मनाया जाता है। यहां चावल से बने व्यंजन प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं। मकर संक्रांति को पतंग पर्व के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों-प्रयाग,हरिद्वार, वाराणसी, कुरुक्षेत्र, गंगासागर आदि में पवित्र नदियों गंगा, यमुना आदि में करोडों लोग डुबकी लगा कर स्नान करते हैं। अथर्ववेद में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि दीर्घायु और स्वस्थ रहने के लिए सूर्योदय से पूर्व ही स्नान शुभ होता है। ऋग्वेद में ऐसा लिखा है कि-हे देवाधिदेव भास्कर, वात, पित्त और कफ  जैसे विकारों से पैदा होने वाले रोगों को समाप्त करो और व्याधि प्रतिरोधक रश्मियों से इन त्रिदोशों का नाश करो।
पश्चिम बंगाल के गंगासागर तीर्थ में मेले का आयोजन होता है। ऐसा माना जाता है कि वरुण देवता इन दिनों में यहां आते हैं। शास्त्रों में यह भी उल्लेख है कि किसी को किसी कारणवश नदी या समुद्र में स्नान करने का अवसर ना मिले तो इस दिन कुएं के जल या सामान्य जल में गंगा जल मिला कर सूर्य भगवान को स्मरण करते हुए स्नान कर सूर्य को तांबे के लोटे में शुद्ध पानी भर कर रोली, अक्षत, फूल, तिल तथा गुड़ मिला कर पूर्व दिशा में गायत्री या सूर्य मंत्र के साथ अष्र्य देना चाहिए।


Thursday, January 12, 2012

पंजाब की लोक संस्कृति का अक्स है लोहड़ी का त्यौहार



शाहाबाद मारकंडा/सुरेंदरपाल सिंह वधावन
हड़तालों घोटालों तनावों और कुंठाओं के चक्रव्यूह में फंसे इस देश के आम इंसान को आज भी हमारे पर्व और त्यौहार भले ही  दो पल के लिए हो, कुछ  सुकून और राहत तो प्रदान करते हीं हैं। -कितने प्यारे लोग थे जिनको अपने गमों से फुरसत थी- फैज़ साहिब के इस अशआर की पंक्ति आज महज़ एक याद महसूस होती है कल की- जब न तो गम-ए-रोज़गार होता था और न ही होता था $गम-ए-इश्क, उस समय इंसानी रिश्तों में जीता आदमी मनोरंजन के जो तरीके अपनाता था उनमें पर्व और त्यौहारों का अपना विशेष महत्व था। त्यौहार आज की भांति मात्र औपचारिकता निभाने के लिए नहीं होते थे अपितु लोग त्यौहारों में जीते थे। आज टी.वी के रंगों से चुंधिआए और  जीवन की भागमभाम में मसरूफ लोगों के पास इतना समय कहां है कि वह इन त्यौहारों को जी भर के जी पाएं। हमारी संस्कृति वास्तव में त्यौहारों की ही संस्कृति रही है। जाड़े के मौसम में आने वाला लोहड़ी त्यौहार विशेषकर पंजाब की लोकसंस्कृति से जुड़ा एक ऐसा पर्व है जो सामान्य संबंधों को घनिष्ठता तो प्रदान करता ही है और साथ ही बेरस और ठंडे पड़ रहे रिश्तों को ताज़गी का अहसास भी देता है। लोहड़ी को तिलोड़ी भी कहा जाता था जिसका मतलब है कि सर्दी के इस मौसम में तिल और गुड़ का सेवन किया जाना चाहिए क्योंकि यह दोनों चीज़ें गर्माहट की तासीर लिए हैं।
लोहड़ी पर्व से जुड़ी कथा के अनुसार लद्धी नामक महिला के  पुत्र का नाम दूल्ला था जो बादशाह अकबर का बागी था। यह बात काबिल-ए-जि़क्र है कि लद्धी अकबर के शहजादे की फ्रॅासटर मदर यानि के दूध पिलाने वाली माता थी। लद्धी का पुत्र दुल्ला अमीरों को लूटता था और ग्ररीबों और बेबसों की मदद करता था इस कारण वह आम लोगों में उसकी छवि एक नायक की भांति थी। एक बार दुल्ले ने बाप बन कर एक ब्राहमण की दो कन्यायों का विवाह करा दिया। इससे लोगों के मन में उसके प्रति अथाह श्रद्धा उमड़ पड़ी। इस से एक लोकगीत का चलन शुरु हुआ और यह गीत लोकपरंपरा के रुप में विकसित हो गया। यह गीत आज भी लोहड़ी के अवसर पर गाया जाता है-सुंदर मुंदरिए -हो, तेरा कौन विचारा -हो, दुल्ला भट्टी वाला-हो, दुल्ले दी धी विआही-हो, सेर शक्कर पाई-हो, कुड़ी दे ज़ेबे पाई-हो ----आदि। इसी तरह बालिकाओं के लोहड़ी मांगने का गीत-हुल्ले नी माए,हुल्ले,दो बेरी पत्र झुल्ओ - दो झुल पइयां खजूरां ,खजूरां सुटिया मेवा, उस लाल दे घर जनेवा, उस लाल दी वहुटी निक्की जो खावे चूरी कुट्टी -कुट-कुट भरिया थाल -बुआ एक ननाना चार   -देंदी एं ते दे काले कुत्ते नूं वी दे- काला कुत्ता दे दुआवां तेरियां जीवण मझियां गाइयां, हमारी विस्मृत हो रही लोक संस्कृति का अमूल्य हिस्सा है।

Tuesday, January 10, 2012

हिमाचल की महिलाओं ने धर्मनगरी में सीखे खुम्ब उत्पादन के गुर



कुरुक्षेत्र/पवन सोंटी
हिमाचल से आई 20 महिलाओं ने एक सप्ताह तक धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में आकर खुम्ब उत्पादन के गुर सीखे। शिमला जिला के रामपुर से बागवानी विकास अधिकारी डा. मनमोहन चौहान व बागवानी प्रसार अधिकारी सुनीता नेगी के नेतृत्व में इन महिला किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र के तत्वावधान में बागवानी व खुम्ब उत्पादन पर एक सप्ताह तक प्रशिक्षण प्राप्त किया। मंगलवार को प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र के वरिष्ठ समन्वयक एवं खुम्ब विशेषज्ञ डा. एसपी गोयल ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके केंद्र से प्रशिक्षण पाकर यह महिलाऐं हिमाचल की वादियों में खुम्ब उत्पादन करेंगी। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि अपने घर जाकर खुम्ब उत्पादन को जरूर अपनाऐं ताकि उनके इस प्रशिक्षण का समुचित लाभ उनको मिल सके। कार्यक्रम के समापन पर सभी महिलाओं को प्रमाणपत्र वितरित किये गए। 
प्रशिक्षण अवधि के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एमएस जून ने बागवानी से संबंधी लाभदायक जानकारी दी व डा. आरएस पन्नू ने कृषि के साथ सहायक धंधों की आर्थिक समृद्धि में योगदान का विस्तार से वर्णन किया। प्रशिक्षण के दौरान भौर सैयदां स्थित खुम्ब उत्पादन फार्म पर जिला के प्रगतिशील किसान हरपाल सिंह बाजवा ने खुम्ब उत्पादन के व्यवहारिक गुर इन महिला प्रशिक्षुओं को सिखाऐ। वहां पर व्यवहारिक रूप से कम्पोस्ट बनाना, बीज मिलाना व केसिंग आदि से लेकर खुम्ब चुनने व धोने और पैकिंग तक की सभी क्रियाओं को अपने हाथों से कर के देखा गया। प्रशिक्षण के दौरान खुम्ब का आचार, पकौड़े व खीर बनाने की जानकारी भी उपलब्ध करवाई गई। इस कार्यक्रम का समन्वयन केवीके के जिला विस्तार अधिकारी डा. जोगेंद्र तोमर ने किया। उनके साथ केंद्र के डा. ओपी लठवाल, दिलबाग सिंह, कर्ण सिंह व डा. शुलक्षणा डोगरा ने भी लाभदायक जानकारी इन महिला प्रशिक्षणार्थियों को उपलब्ध करवाई।