Monday, July 8, 2013

मेरी हरयान्वी कहानियाँ ..भाग 1

हरियाणवी में कथा लेखन बहुत कम हुआ है, ये बात सोचकर मैंने हरियाणवी भाषा (बोली) में कहानी लेखन का प्रयास किया है. मेरी पहली हरियाणवी कहानी जो हरी भूमि के रोहतक संस्करण में छपी है, मैं उसके लिए सम्पादक श्री ओमकर चौधरी जी का ह्रदय से आभारी हूँ...आप सब भी कृपया इसे जरूर पढ़ें और अपने बहुमूल्य विचार भेंजें
 

3 comments:

  1. SACHMUCH BAHUT ACHACHA LGA----------JOR-A-KALAM AUR BULAND HO

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  2. जी धन्यावाद भाई साहब ..हम आप के आभारी हैं

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  3. कहानी अच्छी है !

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