पवन सोंटी का जन्म हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिला के खंड लाडवा के गांव सोंटी में 9 मई 1972 को हुआ। उस समय इनके पिता चौधरी हरिचंद गांव के सरपंच थे। वह अपने समय में क्षेत्र के सर्वाधिक पढ़े लिखे लोगों में से थे जिन्होंने 1934 में वर्नाकुलर स्कूल लाडवा से, लाहौर शिक्षा विभाग के माध्यम से, आठवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की हुई थी। माता फुलियां देवी व बड़ी मां भुल्लां देवी सामान्य गृहणियां थी।
Friday, July 21, 2023
Monday, July 18, 2022
ऐनबीए चेयरमैन प्रो. के.के. अग्रवाल की किस बात से नाराज हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान...Union Minister Dharmendra Pradhan was angry with NBA Chairman Prof. KK Aggarwal what said ......?
सीधे नाम लेकर क्या दिया ज्ञान...कहां जाने से की मनाही.....
15 जुलाई 2022 को एनआईआरएफ हायर एजुकेशन रैंकिंग प्रोग्राम में मंचासीन लोगों को संबोधित करते हुए बोले धर्मेंद्र प्रधान; हायर एजुकेशन इक्को सिस्टम पर आप लोगों से है तीन विषयों की महत्वपूर्ण शर्त और अपेक्षा। आपकी एसेसमेंट ऑब्जेक्टिव हो, विदाउट एनी फीयर और बॉयस हो........., और आप सभी का दायित्व है कि ........हम प्रभावित नहीं होंगे अगर हमारे पास आप नहीं आओगे तो। आप आना बंद करिए। जो रैंकिंग में आपके पास आए उसे डी मारक कर दीजिए। वहीं से सुधार शुरू होगा, लेकिन उसके लिए मंच पर बैठे लोगों को भी उतनी पारदर्शिता दिखानी पड़ेगी।
उन्होंने एनबीए चेयरमैन प्रोफेसर केके अग्रवाल को नाम लेकर संबोधित करते हुए कहा कि आप प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में नहीं जाइए।
हमें सब मिलकर यह कमिटमेंट करना पड़ेगा कि फ्रेमवर्क चलाने वाले लोग एबोव द बोर्ड होने चाहिए, जिससे हमारी एसेसमेंट ठीक से हो।
......आखिर धर्मेंद्र प्रधान को यह संदेश क्यों देना पड़ा? क्या प्रोफेसर केके अग्रवाल कहीं पक्षपात कर रहे हैं?
अगर ऐसा है तो यह बहुत ही चिंतनीय विषय है।देश की इतनी बड़ी संस्था NBA के अध्यक्ष अगर संदेह के दायरे में हों, तो सरकार की भी साख गिरती है और उन संस्थानों की भी।
सुनिए पूरा वीडियो और दीजिए अपनी राय।
Union Minister Dharmendra Pradhan was angry with NBA Chairman Prof. KK Aggarwal what said ......?
Friday, June 25, 2021
ऐलनाबाद उप चुनाव और ओमप्रकाश चौटाला: क्या फिर से दोहराया जा सकता है 51 वर्ष पुराना इतिहास
चंडीगढ़, 25 जून/ एग्रोमीडिया
हरियाणा की हॉट सीट ‘ऐलनाबाद’ में फिर से उपचुनाव हैं और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी जेल से बाहर आ रहे हैं। ऐसे में ये भी एक प्रश्न है कि क्या 51 साल बाद फिर इतिहास को दोहराया जा सकता है? ध्यान रहे कि कुल पांच बार मुख्यमंत्री रहे और इनेलो पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले में दिल्ली की एक सीबीआई कोर्ट द्वारा दी गई 10 वर्ष कारवास की सजा (उसमें से विभिन्न छूटों सहित 9 वर्ष 6 महीने की सजा) पूर्ण होने के बाद अगले सप्ताह तक कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद रिहा हो रहे हैं।
क्यों खाली है ऐलनाबाद
आगामी कुछ माह में सिरसा ज़िले की ऐलनाबाद सीट का उपचुनाव भी होना है, जहाँ से अक्टूबर, 2019 विधानसभा आम चुनावों में उनके छोटे पुत्र अभय सिंह चौटाला विधायक
निर्वाचित हुए थे परन्तु इसी वर्ष 27 जनवरी को केंद्र के तीन
कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने उस सीट से त्यागपत्र दे दिया था। हालांकि इस
सीट का उपचुनाव सीट रिक्त होने के छः माह के भीतर अर्थात आगामी 27 जुलाई से पहले हो जाना चाहिए, परन्तु गत माह भारतीय
चुनाव आयोग द्वारा निर्णय लिया गया है कि कोविड-19 महामारी से
उत्पन्न हालात सामान्य होने के बाद ही उपचुनाव करवाया जाएगा।
चुनाव आयोग के पाले में होगी गेंद
बहरहाल, क्या अब बड़े चौटाला
ऐलनाबाद उपचुनाव लड़ सकते है? इस पर पंजाब एवं हरियाणा हाई
कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार का कहना है कि यह इस पर निर्भर करेगा कि क्या भारतीय
चुनाव आयोग उनकी चुनाव लड़ने सम्बन्धी अयोग्यता अवधि को आरपी एक्ट (कानून),
1951 की धारा 11 में हटाता है अथवा नहीं। भ्रष्टाचार
निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट), 1988 में दोषी साबित होने कारण
कानूनन चौटाला रिहाई से 6 वर्षो तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते।
51 वर्ष पूर्व भी चौटाला ने जीता था ऐलनाबाद
उपचुनाव
आज से 51 वर्ष पूर्व मई,
1970 में ओम प्रकाश चौटाला ने अपने राजनीतिक जीवन का पहला उपचुनाव
ऐलनाबाद से ही जीता था जब उस सीट से 1968 विधानसभा आम चुनावो
में निर्वाचित राव बीरेंदर सिंह की विशाल हरियाणा पार्टी (वीएचपी ) के विधायक लाल
चंद का चुनाव रद्द कर दिया गया था और उपचुनाव करवाना पड़ा था। उस समय बंसी लाल
प्रदेश के मुख्यमंत्री थे जबकि भजन लाल उनके मंत्रिमंडल में थे।
ये है चौटाला की चुनावी यात्रा
हेमंत ने बताया कि जब जून, 1987 में देवी लाल प्रदेश के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने, तो
उन्होंने अगस्त, 1987 में अपने चौटाला को राज्य सभा सांसद
बनवाया था। दरअसल, कांग्रेस के एम.पी.कौशिक जो अप्रैल,
1984 में राज्य सभा सांसद बने थे की मई, 1987 में
मृत्यु के बाद रिक्त हुई सीट से पहले कुछ समय के लिए जनता दल के कृष्ण कुमार दीपक
और फिर उनके त्यागपत्र के बाद चौटाला को शेष बची अवधि अर्थात अप्रैल, 1990 तक राज्य सभा सांसद बनाया गया। हालांकि राज्य सभा सांसद रहते हुए चौटाला
प्रदेश के पहली बार 2 दिसंबर, 1989 को पहली
बार मुख्यमंत्री बने। चूँकि चुनावी हिंसा के कारण दो बार महम विधानसभा उपचुनाव
रद्द करना पड़ा था, इसलिए चौटाला ने मई, 1990 में सिरसा के दड़बा कलां से उपचुनाव जीता। फिर वर्ष 1993 में नरवाना उपचुनाव जीता. उसके बाद 1996 , 2000 , 2005 और 2009 विधानसभा आम चुनावों में नरवाना, रोड़ी, उचाना कलां और ऐलनाबाद सीटों से चुनाव जीता।
.......अब ओम प्रकाश चौटाला लड़ सकते हैं चुनाव! रिहाई से 6 वर्षो तक चुनाव लड़ने पर है प्रतिबन्ध परन्तु आयोग दे सकता है राहत: एडवोकेट हेमंत
चंडीगढ़ (24 जून, 2021) एचपी न्यूज
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला लंबे समय के बाद जेल से मुक्त होकर बाहर आ रहे हैं। ऐसे में ये सवाल सबके मन में है कि क्या वे आगामी विधानसभा अथवा लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं?
जी हाँ! अगर चुनाव आयोग चाहे तो वे चुनाव लड़ सकते हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार वैसे तो लोक प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 8 (1 ) के अनुसार अपनी रिहाई से छः वर्ष की अवधि तक अर्थात जून, 2026 तक ओम प्रकाश चौटाला कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकतें है, लेकिन अब रिहाई के बाद चौटाला के पास भारतीय चुनाव आयोग के पास उक्त कानून की धारा 11 में एक याचिका दायर अपनी छः वर्ष की अयोग्यता अवधि को कम करने या पूर्णतया हटाने की प्रार्थना करने का विकल्प है जिसे करने के लिए तीन सदस्यी चुनाव आयोग कानूनन सक्षम है।इनको भी मिली है राहत
हेमंत कुमार के अनुसार सितम्बर, 2019 में भारतीय चुनाव आयोग ने सिक्किम के वर्तमान मुख्यमंत्री और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के नेता प्रेम सिंह तमांग की भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम, 1988 के अंतर्गत दोषी पाए जाने के कारण उन पर लगी छ: वर्ष के लिए चुनाव लड़ने की अयोग्यता सम्बन्धी अवधि को घटाकर 1 वर्ष 1 माह कर दिया है। आयोग ने यह निर्णय तमांग द्वारा जुलाई, 2019 में दायर एक याचिका पर दिया था। हेमंत के अनुसार इससे पहले हालांकि तमांग अगस्त, 2024 तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते थे परन्तु 10 सितम्बर, 2019 के बाद वह चुनाव लड़ने के लिए कानूनी सक्षम हो गए। इसी कारण वह सिक्किम विधानसभा का उपचुनाव चुनाव लड़ सख्त थे क्योंकि मई, 2019 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने समय वह विधायक नहीं थे।
ये थी सजा
गौरलतब है कि चौटाला को जनवरी, 2013 में दिल्ली की रोहिणी सीबीआई कोर्ट द्वारा प्रदेश के जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट), 1988 की धारा 13 (2 ) एवं आई.पी.सी. की धाराओं 120 बी, 418 , 467 एवं 471 में दोषी पाए जाने पर दस वर्ष की कठोर सजा दी गयी थी जिसके बाद से वो दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। हालांकि समय समय पर परोल, फर्लो, बीमारी आदि कारणों से वह कुछ समय के लिए जेल से बाहर आते रहे एवं गत कुछ माह से वह कोविड-19 के फलस्वरूप उत्पन्न परिस्थितयों से परोल पर बाहर हैं, उन्हें उनकी वृद्ध आयु और दिव्यांगता के कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली ( एनसीटी) सरकार अर्थात दिल्ली के उप-राज्यपाल की मंजूरी से उन्हें उनकी छः महीने की लंबित सजा से छूट दे दी गयी है, जिस कारण उनकी शेष बची जेल में रहने की सजा समाप्त हो जायेगी क्योंकि जेल नियमों में मिली रेमिशन्स (छूटों) आदि को मिलाकर उनके नौ वर्ष छः महीने की सजा पहले ही पूरी हो चुकी है।
क्या इनको भी मिलेगी जेल से रिहाई
अब यह देखने लायक होगा कि क्या उनके बड़े पुत्र और जजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला, जो हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पिता भी है एवं शेर सिंह बढ़शामी जिन्हे उपरोक्त केस में ही दोषी पाए जाने पर 10-10 वर्षो की सजा मिली थी, क्या उन्हें भी जेल से जल्द रिहाई मिल सकेगी?
Wednesday, May 5, 2021
गलत बकाया राशि के साथ जारी हो गए 1.40 लाख उपभोक्ताओं के स्पॉट बिल; तारीख को आगे बढ़ाकर जारी किए नए बिल
चंडीगढ़, 5 मई
हरियाणा बिजली वितरण निगमों के बिलिंग सॉफ्टवेयर में आई तकनीकी त्रुटि के कारण, 16 अप्रैल, 2021 से 26 अप्रैल, 2021 की अवधि के दौरान लगभग 1.40 लाख उपभोक्ताओं के स्पॉट बिल गलत बकाया राशि के साथ जारी हो गए थे। इस त्रुटि के कारण कई शहरों में उपभोक्ताओं को पिछले बिलों का भुगतान करने के बावजूद गलत बकाया राशि मिली यद्यपि बिलिंग सिस्टम में उपरोक्त बिल बिल्कुल ठीक बने हैं और जो उपभोक्ता ऑनलाइन या विभाग के काउंटर पर जाकर बिल भरते हैं, वहां दिखाई गई बिल की राशि में बकाया संबंधित कोई त्रुटि नहीं है।
उक्त जानकारी देते हुए बिजली निगम के प्रवक्ता ने बताया कि इस त्रुटि के कारण उपभोक्ताओं को हुई असुविधा के मद्देनजर बिजली निगमों द्वारा प्रभावित उपभोक्ताओं केे बिजली बिल भरने की तारीख को आगे बढ़ाकर नए बिल जारी कर दिए गये हैं। इस संबंध में किसी भी अन्य जानकारी/स्पष्टीकरण के मामले में उपभोक्ता ‘ग्राहक सेवा केंद्र’ से संपर्क करने के लिए यूएचबीवीएन के टोल फ्री नंबर 1912/18001801550 तथा डीएचबीवीएन के टोल फंी नंबर 18001804334 पर कॉल कर सकते हैं या यूएचबीवीएन के उपभोक्ता व्हाट्सएप नंबर 9815961912 और डीएचबीवीएन के उपभोक्ता व्हाट्सएप नंबर 8813999708 पर मैसेज कर सकते हैं।हरियाणा के बिजली वितरण निगम अपने उपभोक्ताओं के हितों के प्रति सदैव तत्पर हैं और प्रदेश में निरंतर निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए वचनबद्ध हैं।
लॉकडाऊन के दौरान आवागमन के लिए विभागीय आई-कार्ड या सरकार द्वारा जारी पास अनिवार्य
चंडीगढ़, 5 मई
हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि राज्य में चल रहे लॉकडाऊन के दौरान आवागमन के लिए विभागीय आई-कार्ड या सरकार द्वारा जारी पास अनिवार्य होंगे। इनके बिना सडक़ों पर घुमने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएं।
श्री विज ने आज यहां पुलिस विभाग के वरिष्ठï अधिकारियों की बैठक में कहा कि स्थानीय स्तर पर ऑनलाइन आवागमन पास बनाने के लिए उपायुक्तों को आदेश दिए गए हैं। इसके लिए पास के इच्छुक लोग saralharyana.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे बेवजह अपने घरों ने बाहर न निकले और जिन कैटेगिरी को लॉकडाऊन में आने जाने की छूट दी गई है, उन्हें भी पास या आई-कार्ड दिखाना होगा।
गृहमंत्री ने राज्य में करियाना, दवाइयों तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को रोस्टर बना कर खोलने के आदेश दिए है। इस प्रकार की सभी दुकानें प्रतिदिन नही खोलने दी जाएं बल्कि रोटेशन में खोली जाए। इसके साथ ही अन्तिम संस्कार में सरकार द्वारा जारी नियमों का पालन करवाया जाए तथा होटल, जिम, क्लब व रेस्ट्रा इत्यादि को पूरी तरह से बंद रखा जाए।
Wednesday, March 10, 2021
Martyrs' Day is observed on March 19th to pay homage to the Khaksars who were injured or sacrificed their lives to free Muslims and non-Muslims from British rule.
Khaksar
Martyrs' Day
By
Nasim Yousaf
In order to stop the Khaksar parade, Donald Gainsford (Superintendent of Police), accompanied by P. C. D. Beaty (Deputy Superintendent of Police), F.C. Bourne (District Magistrate), a City Magistrate, and heavily armed policemen arrived on the scene. The Khaksars were ordered to immediately abandon the protest march, but they brushed aside the instruction. Not to be defied, Gainsford slapped the leader of the Khaksar contingent. This resulted in a “SERIOUS CLASH BETWEEN KHAKSARS AND POLICE” (The Tribune, March 20, 1940). The police’s indiscriminate firing took over 200 Khaksar lives (though officially reported figures falsely stated a lower number) and an even larger number were injured. According to the register of the Moharir (record keeper) of the district police, 1,620 rounds had been issued to the police at the start of the day and only 1,213 were returned, meaning 407 bullets were fired.
The
dead and injured Khaksars were brutally dragged, kicked, and humiliated by the
police. The slaughter was the bloodiest and most ruthless killing since the
Jallianwala Bagh massacre in Amritsar by General Dyer on April 13, 1919. The
people of the nation were outraged by the massacre and the treatment of the
Khaksars. In Lahore, the military was called in; curfew, press censorship, and
Section 144 were also imposed. The news flashed not only in British India, but
was also reported by print media as well as radio in many parts of the world.
Due to Government propaganda, the killed Khaksars were not declared heroes or
martyrs, but rather labeled as rebels and fascists.
Three
days after the tragedy, the All-India Muslim League held
its session in Lahore (from March 22 to 24, 1940) at Minto Park (now
Iqbal Park and the site of the Minar-e-Pakistan monument). The Khaksar massacre
was still fresh in people’s minds and tens of thousands thronged to the venue
and demanded an inquiry into the barbaric killing along with the release of
Mashriqi, his sons, and the Khaksars, and the removal of the ban on the Khaksar
Tehrik. As a result of the fierce public pressure, the
Muslim League passed the Khaksar Resolution on March 24, 1940 (not March 23rd
as is usually reported) along with the Lahore Resolution (later Pakistan Resolution). Regrettably, no information about the Khaksar Resolution
is mentioned at the site of the Minar-e-Pakistan monument.
Based on intense public demand, an inquiry committee was formed by the Punjab Government to investigate the firing of the Khaksars. The committee was headed by Sir Douglas Young (Chief Justice of the Lahore High Court). Upon completion of the investigations, a report was submitted to the Government. However, the findings of the report were never released - the Government should make them public now.
The first Martyrs’ Day was observed in British India on March 19, 1941. Sir Henry Duffield Craik (Governor of Punjab) confirmed the occasion in a letter (dated April 28, 1941) to Lord Linlithgow (Viceroy of India), informing him that the Khaksars observed “Martyrs’ Day” in remembrance of the massacre on March 19, 1940 and distributed black flags.
The rulers resented honoring the martyrs. Yet from 1941 onwards, Khaksar Martyrs’ Day was solemnly and regularly observed by the Khaksar Tehrik nearly every year across British India. The somber occasion not only reminded people to remember the martyred, but greatly bolstered the freedom movement. The Khaksars’ martyrdom did not go to waste and, within seven years of the bloodbath on March 19th, two hundred years of British rule in India came to an end.
Unfortunately, after the partition of India in 1947, Jinnah’s Government confiscated Mashriqi and the Khaksar Tehrik’s extensive literature. Since Mashriqi and the Khaksars fought for a united India and did not support the creation of Pakistan, the new Pakistani Government sought to suppress their voice in history. Similarly, in India, Jawaharlal Nehru, who was Mashriqi’s classmate at Cambridge University, did not want Indians to know of Mashriqi’s leading role in the freedom movement. Thus, Nehru not only banned the Khaksar activities, but also seized Mashriqi and the Tehrik’s historical documents. The idea behind seizing Mashriqi and the Khaksars’ papers in both countries was not only to deny Mashriqi’s role in the freedom movement, but also to hide the fact that the leaders who endorsed partition had actually collaborated with the British to divide India for their own as well as British political and economic interests. This suppression of history continues in both countries even today.
With these actions, Pakistan and India continue to teach a distorted history and only recognize those leaders who worked with the British rulers. I have demanded via open letters (available on the internet) to Pakistan, India, and the United Kingdom’s Governments to declassify Mashriqi and the Khaksar Tehrik’s materials (confiscated during the pre- and post partition era), but thus far nothing has come from this effort. Although some files from the Government of British India are available on the Khaksar Tehrik, they only represent the British Government’s version of events. Writers have used this one-sided view of history to tarnish Mashriqi’s image.
Despite no official recognition in Pakistan and India, Mashriqi’s supporters and the Khaksar Tehrik in Pakistan have continued to observe the Khaksar Martyrs’ Day for decades. Each year, a ceremony is held at the Khaksar Tehrik Headquarters at 34-Zialdar Road in Icchra, Lahore (where Mashriqi is buried). This year, the Khaksar Tehrik has already announced that the day will be observed across Pakistan. The day will include speeches to remember the departed souls and their contributions toward freedom shall also be shared with the attendees. Mashriqi’s supporters and the Khaksars' shall visit Miani Sahib graveyard to offer Fateh and lay flowers on the graves of martyred Khaksars. In other cities of Pakistan, apart from paying homage, prayers for the departed souls shall also be held.
These martyrs deserve to be remembered, as they sacrificed their lives for the freedom of Muslims, Hindus, Sikhs, and people of other faiths living in British India and for their future generations. Historically, freedom from strong and oppressive rule does not come via constitutional fights, table talks or other passive methods alone; it demands constant resistance subverting activities, and deep sacrifices such as those made by the Khaksars. This was also the case in the freedom of British India.
To conclude, people of the sub-continent should remember that they have freedom today as a result of the Khaksars’ martyrdom and unwavering defiance of the colonial rulers. The Governments of Bangladesh, India, and Pakistan should officially declare March 19th “Khaksar Martyrs Day.” In addition, these Governments should issue instructions to museums to include artifacts from Mashriqi and the Khaksar Tehrik's fight for freedom. The authorities in Pakistan should also ensure that the Khaksar Resolution is inscribed at the Minar-e-Pakistan site and a memorial is built at the location where the Khaksars were ruthlessly injured or killed. The nations must honor the Khaksar heroes of the past, whose sacrifices brought freedom to the region and cannot be erased from history.
Nasim Yousaf, a grandson of Allama Mashriqi, is a researcher based in the USA. He has presented papers at academic conferences, published many books, compiled a digital version of his historic works (“Al-Islah” weekly journal), and contributed articles to prestigious and peer-reviewed encyclopedias and academic journals. His works have been published in newspapers in both the East and West.
Monday, November 2, 2020
दिलदीप सिंह को जन्मदिवस पर सहयोगियों ने दी शुभकामनाएं
चंडीगढ़,3 नवम्बर, सुरेंद्र पाल वधावन
अपनी कर्तव्यनिष्ठा व विनम्रता के लिए विख्यात सरदार दिलदीप सिंह को आज उनके जन्मदिवस पर सहयोगियों ने ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। दिलदीप सिंह चंडीगड़ के पेयजल विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। इस मौके पर राजिंदर सिंह सहित काफी संख्या में स्टाफ के लोग मौजूद रहे।
Friday, July 10, 2020
UP Update: विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में मौत, जानिए कैसे और कब हुआ क्या-क्या घटनाक्रम
उन्होंने बताया कि जवानो के घायल होते ही विकास ने एक जवान की पिस्टल लेकर भागने का प्रयास किया। पुलिस टीम ने उसे घेर कर आत्मसमर्पण करने के लिये कहा लेकिन वह नहीं माना और पुलिस टीम पर जान से मारने की नियत से फायर करने लगा। पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ जबाबी फायरिंग की गई जिसमें विकास घायल हो गया। उसे लाला लाजपत राय अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने इलाज के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया।
बता दें कि विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया था। जब पुलिस उसे गिरफ्तार कर गाड़ी में बैठा रही थी, तब उसने चिल्लाकर बताया था कि मैं विकास दुबे कानपुर वाला हूं।पुलिस कानपुर एनकाउंटर मामले के बाद से ही फरार चल रहे इस कुख्यात आरोपी की तलाश में जुटी थी।गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे लगातार पूछताछ की। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान गैंगस्टर ने कई बड़े खुलासे भी किए। कानपुर एनकाउंट वारदात के बाद से फरार विकास यूपी, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश पुलिस को चकमा देकर उज्जैन पहुंचा था।
विकास दुबे की गिरफ्तारी से पहले गुरुवार सुबह दुबे के दो करीबियों रणबीर शुक्ला और प्रभात मिश्रा को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। प्रभात मिश्रा को पुलिस ने फरीदाबाद के होटल से गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि प्रभात पुलिस की कस्टडी से भाग रहा था। इसके बाद एनकाउंटर में प्रभात को मार गिराया गया।
गौरतलब है कि कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे और उसके साथियों से मुठभेड़ में डीएसपी देवेंद्र मिश्र समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। तभी से पुलिस इनकी तलाश में जुटी थी।
जानिए विकास दुबे को लेका क्या रहा पूरा घटनाक्रम
Saturday, June 27, 2020
कोरोना से जागरूक करने आगे आए इनैलो के युवा गगन बड़शामी
देश-दुनिया में कोरोना को लेकर चल रहे तनाव के बीच इनैलो के युवा नेता ने भी सरकार पर तंज़ कसने शुरू कर दिये हैं। लाडवा विधानसभा से इनैलो के पूर्व विधायक चौधरी शेर सिंह बड़शामी के पौत्र एवं युवा नेता गगन बड़शामी (Gagan Barshami) ने प्रेस को जारी ब्यान में आरोप लगाए हैं कि सरकार इस महामारी के सामने सरेंडर कर चुकी है। ऐसे में जनता को अपने स्वास्थ्य का ख्याल खुद ही रखना होगा।
उन्होने कहा कि महामारी को किसी भी हाल में हल्के में नहीं लिया जा सकता, लेकिन इससे डरना भी गलत है। जैसा कि स्वास्थ्य विभाग और डबल्यूएचओ ने बताया है, इसके लक्षण नजर आते ही फौरन अपनी जांच करवाएँ। महामारी कानून के नियमों का पालन करें व स्वछता तथा सामाजिक दूरी का ख्याल रखें। लेकिन सरकार से किसी उम्मीद की अपेक्षा नजर नहीं आती।
उन्होने कहा कि शिक्षा को लेकर सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी और न ही किसानों के लिए कोरोना महामारी में कोई राहत दी गई है। उलटे धान रोपाई के वक्त डीजल के दाम बढ़ाकर सरकार ने किसानों का गला दबाने का काम किया है। उन्होने कहा कि जनता एक एक चीज को नोट कर रही है और वक्त आने पर हर बात का हिसाब लेगी।
Tuesday, December 17, 2019
एनजीटी के आदेशों के अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का समय आ गया है :प्रीतम पाल
जस्टिस प्रीतम पाल ने लाडवा के एक पोल्ट्री फार्म के खिलाफ कार्रवाई में देरी करने पर लिया संज्ञान, पोल्ट्री फर्मा पर 20 लाख रुपए जुर्माना लगाने अनुशंसा भी की
होटलों के कचरे का प्रबंधन जांचने के दिए आदेश
कचरा प्रबंधन स्थलों के आसपास से पानी के सैम्पल लेने के दिए आदेश
बार कोडिंग सिस्टम से चैक होगा अस्पतालों में कचरा प्रबंधन
1 साल में दर्ज की 150 एफआईआर
कुरुक्षेत्र में 62 टन कचरा रोजाना होता है पैदा
थानेसर नगर परिषद ने किए 492 चालान और लगाया 2 लाख 26 हजार का जुर्माना
जिले में 52 जगहों को किया चिन्हित जहां लगते थे गंदगी के ढेर
कार्यकारी कमेटी के चेयरमैन एवं सेवा निवृत जस्टिस प्रीतम पाल ने मोबाईल पर चैक की टिप्पर की लोकेशन
Thursday, December 12, 2019
हरियाणवी संस्कृति को वैश्विक स्तर पर उठाने में कामयाब रहा विरासत हैरिटेज: मेजर अभिमन्यु
इस अवसर पर विरासत हेरिटेज विलेज के संयोजक डाक्टर महासिंह पूनीय ने स्मृतिचिन्ह देकर उनको सम्मानित किया। मेजर अभिमन्यु व ईशा सिंह ने कहा कि अपनों के बीच में इस प्रकार सम्मान पाकर बहुत ही खुशी होती है। इस अवसर पर डाक्टर महासिंह पूनीय, प्रो. सुदेश छिक्कारा, डाक्टर आबिद अली, पवन सोंटी, तेजस्विनी, विनय चौधरी, हरिओम द्विवेदी आदि गणमान्य व्यक्तियों सहित अनेकों दर्शक भी उपस्थित थे।

















