Saturday, March 10, 2018

बिखरे कार्यकर्ताओं को सहारा देने का काम कर रही है तंवर की साइकिल यात्रा


हरियाणा बचाओ-परिवर्तन लाओ साइकिल यात्रा से कार्यकर्ताओं में जोश भरने में सफल हो रहे हैं प्रदेशध्यक्ष
कुरुक्षेत्र, 10 मार्च (पवन सोंटी)
हरियाणा में लंबे समय से बिखराव को झेल रही कांग्रेस को अब प्रदेशाध्यक्ष डाक्टर अशोक तंवर अपनी साइकिल यात्रा के मध्यम से काफी सहारा दे रहे हैं। हालांकि सत्ता से बाहर होने से पहले ही कांग्रेस में आया ये बिखराव तब से शुरू हो गया था जब तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के विश्वास पात्र फूल चंद मुलाना को हटाकर तंवर को हरियाणा कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। उसके बाद से हुड्डा गुट द्वारा निरंतर अप्रत्यक्ष रूप से तंवर का विरोध शुरू हो गया था। दिल्ली में तो नौबाट मारपीट तक आई थी। यही कारण रहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस वांछित प्रदर्शन नहीं कर पाई थी।

ज्यों ज्यों चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं त्यों त्यों प्रदेश की राजनीति में उफान आता जा रहा है। कांग्रेस का हरियाणा में मजबूत जनाधार होने के कारण इसके पास कार्यकर्ता तो बहुत हैं, लेकिन असंगठित होने के कारण उनमें जोश का अभाव था। अब तंवर हरियाणा बचाओ-परिवर्तन लाओ साइकिल यात्रा से उन कार्यकर्ताओं में जोश भरने में सफल हो रहे हैं। काफी हद तक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तंवर को अपना नेता स्वीकार करना शुरू कर दिया है।
अगर अशोक तंवर इसी तरह विरोध व विरोधियों को नजर अंदाज करते हुए आगे बढ़ते रहे तो कांग्रेस के कारकर्ताओं को पूरी तरह संगठित करने में सफल हो सकते हैं। यात्रा के पहले चरण के अंतिम पड़ाव से 2 दिन पहले लाडवा में जिस तरह पार्टी की विचार धारा से जुड़े पुराने नेता और कार्यकर्ता तंवर के साथ नजर आए उसे देखकर लगता है कि 2019 के चुनाव तक हरियाणा कांग्रेस काफी मजबूत हो सकती है।
कुरुक्षेत्र से जुड़े मुद्दों के साथ गिनवाई कांग्रेस की उपलबधियाँ
कुरुक्षेत्र में अपनी यात्रा के दौरान तंवर ने कहा कि कौरवों और पांडवों के बीच धर्म-अधर्म की लड़ाई हुई थी। कुरुक्षेत्र में यूनिवर्सिटी बनाने की बात हो या रिजनल इंजीनियरिंग कॉलेज जिसे बाद में एनआईटी का दर्जा मिला, कुरुक्षेत्र के विकास के लिए ये कांग्रेस का धर्म था। आज की बात करें तो गीता जयंती के नाम पर चहेतों के बीच भ्रष्टाचार की रेवड़ी बटना, ब्रह्मसरोवर में ताजा पानी लाने की योजना में गोलमाल, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के बजट में कटौती करना, गौ माता का अपमान जैसे अधर्म के काम हरियाणा में खट्टर की भाजपा सरकार ने किए।
तंवर ने कहा धर्म और ज्ञान के नगर कुरुक्षेत्र में दोनों पर ही संकट आया है। बजट में कटौती से कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ सडक़ पर है, छात्र संघ चुनाव को लेकर छात्रों को गुमराह किया जा रहा है। गीता जयंती के नाम पर 32 करोड़ की बंदरबांट आपने देखी, ब्रह्मसरोवर में ताजा पानी लाने की योजना घपले की भेंट चढ़ी।
बजट पर भी दी बेबाक राय
विधानसभा में खट्टर सरकार द्वारा पेश बजट पर बोलते हुए तंवर ने कहा की हरियाणा को पीछे धकेलने के लिए बजट में जिस तरह भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए गए उसे देख कर लगता है कि भाजपा ने अपने पिछले सभी बजट की तरह जनता की आंखों में धूल झोंकने का फिर से प्रयास किया है। बजट में पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस पर करो में किसी प्रकार की कटौती ना करना, शिक्षा-स्वास्थ्य-रोजगार पर ठोस नीति का अभाव, चुनाव करीब आठ देख केंद्र की यूपीए सरकार के समय मंजूर यमुनानगर-चंडीगढ़ वाया नारायणगढ़-साढौरा जैसी रेल, विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग सडक़ परियोनाओं तथा हरियाणा में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मंजूर इंजीनियरिंग परियोजनाओं का नाम लेकर वित्त मंत्री ने हरियाणा की जनता को बहकाने का काम किया है।
प्रदेश स्तर के मुद्दे भी उठा रहे हैं तंवर

यात्रा के दौरान तंवर अपने पड़ाव के दौरान स्थानीय मुद्दों के साथ प्रदेश स्तरीय मुद्दे भी खूब उठा रहे हैं। उन्होने मोदी-शाह-खट्टर के संरक्षण से यमुनानगर से पलवल तक चल रहे अवैध खनन, सरस्वती नदी के नाम पर 260 करोड़ का गोलमाल, पॉपलर की गिरती कीमत, सरकारी स्कूल-कॉलेजों में शिक्षा के गिरते स्तर, गन्ना किसानों की समस्या, बिगड़ती कानून व्यवस्था, समाज को जाति-धर्म के नाम पर बांटने, सडक़ों की बदहाली, बिजली की किल्लत, बढ़ती बेरोजगारी, गौमाता का अपमान, आंगनवाड़ी वर्कर्स के आंदोलन, महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अत्याचार आदि मसलों पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस गरीब-किसान-मजदूर के हक की आवाज को उठाती है जबकि भाजपा पूंजीपतियों के इशारे पर इन्हें दबाना चाहती है लेकिन कांग्रेस जनता के संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।
ये रहे साथ: 
कुरुक्षेत्र जिला में उनकी यात्रा के दौरान उनके साथ पूर्व मंत्री बिजेंद्र कादयान बिल्लू, पूर्व विधायक राजरानी पूनम, भूपेंद्र राणा, दीप सैनी, विशाल सिंगला, जगबीर मढान, संतोष पंचाल कुरूक्षेत्र, राकेश सैनी सुंदरपुर, ईश्वर बाल्मीकि फतहपुर, अजय शर्मा पिपली, राजीव धराडसी,अशोक शर्मा पूर्व ब्लॉक समिति मेंबर ,श्रीकांत बंसल, मनोज बगथला, सतवीर घराडसी, जोरा सिंह, सूरज दवखेड़ी, रणधीर सिंह, ओमप्रकाश मेहरा, अंजलि डी के बंसल,  संदीप बूरा, प्रमोद सहवाग, जगजीत हुड्डा ,सुनील पवार, कंवर दीप सैनी ,लक्ष्मीकांत शर्मा, सुरेंद्र फौजी, पृथ्वी तुर्क ,सुरजीत पलवल , रणबीर पलवल, गोविंद राम ,सुभाष पाली, शमशेर कश्यप, बिमला सरोहा, रेखा कश्यप, रीना बाल्मीकि, नरेंद्र जबल, प्रभात शादीपुर,श्यामा नंबरदार,  हरि सिंह मखाना, सुरजीत,  शेरी मान,  बादल सिंह ,जगदीश सिंह, राजकुमार पंचाल ,विनोद सेखड़ी, रायसाहब शर्मा, लक्ष्मीकांत शर्मा ,विवेक भारद्वाज डब्बू ,श्याम चोपड़ा ,उजागर सिंह, जरनैल डूबा, सुरेंद्र चिब्बा, पवन गर्ग, प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप सोनी, कोषाध्यक्ष तरूण भंडारी, रोहित दलाल जुलाना, कुलदीप गदराना डबवाली, लादूराम पूनिया, हीरा लाल यादव बावल, कैलाश चन्द्र झज्जर, सतीश बंधं, पवन खरखौदा, सुरजीत भावदीन, अमित सोनी सिरसा, कपिल सरावगी, महासचिव भूपेन्द्र सिंह राणा, हरिओम कौशिक व श्रीमती मनवीर कौर गिल, वीरेन्द्र चौहान, महाबीर खुर्दी, दलबीर बाल्मीकि, साहब खान पटवारी, इब्राहिम इंजिनीयर व अमन अहमदर मेवात, मस्तराम बागड़ू जीन्द, सुखवीन्द्र सिंह जैलदार अम्बाला, जेडी सिंह, जगजीत मोहड़ा, देवेंद्र सिंह बबली टोहाना, प्रमोद सहवाग जींद, विकास चौधरी फरीदाबाद, पंकज पूनिया करनाल, सतपाल कौशिक यमुनानगर, रवि चौधरी, कपूर सिंह अम्बाला, भूपेन्द्र गंगवा, वंदना पोपली, जसबीर गुज्जर, सुंदर सिंह, देवीराम कसान, मास्टर योगेन्द्र पुण्डरी, दयाल सिंह पिंजोरी, सत्यवीर डागर, अजीत फौगाट चरखी दादरी, आई टी सेल के प्रदेश अध्यक्ष पंकज खरबंदा, लीगल सैल के चेयरमैन नवीन शर्मा व सीनियर वाइस-चेयरमैन नरेंद्र कौशिक, एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संदीप बूरा, नवीन केडिया सिरसा, राकेश सौंधी, हिम्मत यादव अटेली, कुलताज सिंह बेरी, प्रिंस मल्होत्रा, आनंद हुड्डा, नवदीप गोदारा हिसार, रेखा बाल्मीकि, धर्मदेव आर्य, खलील अहमद, मेघराज, इन्द्र दलाल सहित कांग्रेस सेवा दल, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस आदि कांग्रेस के अग्रणी संगठनों के पधाधिकारी, बीते विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के अनेक प्रत्याशी, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी साइकिल पर सवार होकर साथ चले।


Saturday, February 24, 2018

कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री ने किया गुरुकुल का दौरा

आचार्य देवव्रत के ‘जीरो बजट प्राकृतिक कृषि’ मॉडल की सराहना की


कुरुक्षेत्र, 24 फरवरी: गुरुकुल कुरुक्षेत्र के जीरो बजट प्राकृतिक कृषि फार्म के अवलोकन हेतु आज गुजरात की अमरेली सीट से सांसद केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री परषोत्तम रूपाला कृषि वैज्ञानिक व अधिकारियों की पूरी टीम के साथ गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचे। गुरुकुल में पहुंचने पर गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी एवं सह-प्राचार्य शमशेर सिंह ने पूरी टीम का जोरदार स्वागत किया। तत्पश्चात् प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी ने स्वयं मुख्य सचिव व उनकी टीम को गुरुकुल की उन्नत व अत्याधुनिक गोशाला, जीवामृत, घनजीवामृत निर्माण केन्द्र, जीरो बजट प्राकृतिक कृषि फार्म सहित पूरे गुरुकुल का अवलोकन कराया। मंत्री महोदय ने गुरुकुल की गोशाला की देशी नस्ल की गायों के स्वास्थ्य और दुग्ध क्षमता की भी खूब सराहना की।
गुरुकुल कुरुक्षेत्र के जीरो बजट प्राकृतिक कृषि फार्म के अवलोकन के दौरान माननीय मंत्री परषोत्तम रूपाला व उनकी टीम ने फसलांे की गुणवत्ता, पैदावार, फसलों पर आने वाले खर्च के विषय में विस्तृत चर्चा की। खेतों में खड़ी गन्ना, आलू, गेंहू व सब्जियों की फसलों को देखकर हिमाचल प्रदेश से आई टीम के सभी सदस्य दंग रह गये। मंत्री महोदय ने कहा कि बिना खाद व पेस्टीसाइड के इतनी उन्नत और अच्छी फसल इससे पहले उन्होंने कभी नहीं देखी। उन्होंने महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी के देशी गाय पर आधारित ‘जीरो बजट प्राकृतिक कृषि’ मॉडल की जमकर तारीफ की और कहा कि निश्चित रूप से यह मॉडल किसानों के आय दोगुनी करने में उपयोगी सिद्ध होगा। अन्त में गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी ने केन्द्रीय राज्यमंत्री परषोत्तम रूपाला को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर गुरुकुल के सह-प्राचार्य शमशेर सिंह, कृषि अधिकारी गुरदीप सिंह, सतपाल सिंह, डॉ. हरिओम आदि उपस्थित रहे। 

Friday, February 16, 2018

इफको ने किसानों को दी संचार सेवाओं की जानकारी, पशुओं के लिए बांटी गई दवाइयाँ


मथाना में पशुओं को लेकर आयोजित हुआ जागरूकता शिविर
कुरुक्षेत्र, 16 फरवरी: गांव मथाना के राजकीय पशु अस्पताल में पशुओं को लेकर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया जिसमें इफको की ओर से किसानों को संचार सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। इस अवसर पर इफको किसान संचार के प्रदेश प्रबन्धक ए. के. चावला ने बताया कि इफको की ओर से कृषि आदान बनाने के साथ-साथ किसानों के लिए निशुल्क संचार सेवाएँ भी दी जा रही हैं।


उन्होने बताया कि अब इफको किसान संचार एसएमएस के अलावा वॉइस मैसेज के द्वारा भी किसानों को जानकारी उपलबद्ध करवा रहा है। इफको की कृषि सुविधा एप्प के जरिये भी किसान अपने स्मार्ट फोन पर अपनी फसलों संबंधित समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए मथाना पशु अस्पताल के पशु चिकित्सक डाक्टर प्रवीण कुमार ने पशुओं की मौसमी बीमारियों के प्रति जागरूकता पर चर्चा करते हुए मुंह-खुर व गलघोटू के टीके लगवाने के लिए भी किसानों को प्रेरित किया। उन्होने बताया कि 16 से 18 मार्च तक रोहतक में प्रदेश स्तरीय पशु मेले का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें पहुँच कर पशुपालक लाभ उठा सकते हैं।

खैरी पशु अस्पताल के वीएलडीए डाक्टर मुलतान सिंह ने बताया कि पशुओं में कम दूध की समस्या का मुख्य कारण पेट के कीड़े भी हो सकते हैं। इसलिए पेट के कीड़ों की दवाई चिकित्सकीय परामर्श के बाद जरूर दें। उन्होने कहा कि इस दवाई के साथ ही लीवर संबंधित दवाई भी देना जरूरी है। उन्होने कहा कि आजकल पशुओं में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पाई जाती है। इसलिए पशुओं को मिनरल मिक्सचर भी जरूर दिया जाना चाहिए।
मथाना के वीएलडीए डाक्टर नरेंद्र सिंह ने शिविर में लाए गए पशुओं का उपचार किया व उन्हें दवाइयाँ दी। उन्होने किसानों को फर्स्टएड के गुर भी सिखाए। इस अवसर पर पशुओं के लिए कई प्रकार की दवाइयाँ भी निशुल्क बांटी गई।

कार्यक्रम के अंत में मथाना के सरपंच प्रतिनिधि चौधरी तेजपाल मथाना ने आए हुए अतिथियों व किसानों का धन्यवाद किया। उन्होने इफको प्रतिनिधियों व पशु चिकित्सकों से अनुरोध किया कि इस प्रकार के शिविर नियमित तौर पर लगाए जाने चाहिए। शिविर में दबखेड़ा के पशु चिकित्सक डाक्टर अतर सिंह व इफको जिला अधिकारियों आदि के अलावा चौधरी मान सिंह, शमशेर सिंह, पवन सोंटी, विक्रम सिंह, संजु अंटेहड़ी, गऊशाला सचिव हारजीत सिंह आदि सहित अनेकों पशुपालक भी उपस्थित थे।
गौवंश धाम एवं अनुसंधान केंद्र का भी किया दौरा
चौधरी तेजपाल के अनुरोध पर इफको की टीम ने मथाना स्थित गौवंश धाम एवं अनुसंधान केंद्र का भी दौरा किया। वहां पर भारी संख्या में गौवंश की मौजूदगी व सही देखरेख को देख इफको प्रदेश प्रबन्धक ए.के. चावला ने खुशी जाहिर की। उन्होने कहा कि इस गौशाला में इतनी भारी संख्या में गौवंश को सँभाला जा रहा है, यह खुशी की बात है। वह अपने उच्चाधिकारियों से मिलकर इफको की तरफ से भी यहाँ के लिए किसी प्रकार की सहायता जारी करवाने का प्रयास करेंगे।


Monday, January 22, 2018

जाट धर्मशाला के समारोह मे बोले दीपेन्द्र हुड्डा: ​किसान वर्ग तभी ऊपर उठ सकता है, जब देश की कृषि मजबूत होगी

कुरुक्षेत्र, 22 जनवरी (विनय चौधरी): जाट धर्मशाला कुरुक्षेत्र का वार्षिकोत्सव एवं दीन बंधु चौधरी छोटू राम जयंती धूम धाम से मनाई गई। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्यातिथि व रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि सर छोटूराम ने एक छोटे से किसान परिवार में जन्म लेकर बहुत बडा मुकाम हासिल किया। वे जाति धर्म से उपर उठकर कहते थे कि पेशावर से लेकर पलवल तक खेत में पसीना बहाने वाले हर किसान मेरे वारिश हैं। उन्होने किसानों को उनके अनेक हक दिलवाए। सर छोटूराम जी अक्सर बोलते थे कि किसान वर्ग तभी ऊपर उठ सकता है, जब देश की कृषि मजबूत होगी। तभी खेत में पसीना बहाकर अन्न पैदा करने वाले किसान के बच्चे सुखी जीवन यापन कर सकते हैं। 

हुड्डा ने कहा कि आज फिर से हरियाणा का किसान मुश्कित के दौर से गुजर रहा है। अब हरियाणा के लोगों को सोच समझ कर आगे बढऩे की आवश्यकता है। पिछले तीन वर्षों में प्रदेश की मौजूदा सरकार ने किसान वर्ग को मुश्किल में डालने का काम किया है। कांग्रेस सरकार का जिक्र करते हुए हुड्डा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी पहली कलम से 1600 करोड रूपए के बिजली के बिल माफ करने का काम किया था। उन्होने किसानों की फसल का भाव देने का कार्य किया था, लेकिन आज स्थिति उल्ट है।
उन्होने कहा कि कांग्रेस राज में जब चीनी 30 रूपए किलो थी तो गन्ने का भाव 310 रूपए प्रति क्विंटल था, लेकिन आज चीनी 40 के पार है तो गन्ने का रेट मात्र 320 रूपए प्रति क्चिंटल है। जबकि चीनी के दाम के हिसाब से गन्ने का रेट 400 रूपए प्रति क्चिंटल होना चाहिए था। कार्यक्रम के दौरान दीपेंद्र हुड्डा ने जाट सभा को 11 लाख रूपए देने की भी घोषणा की। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा ने कहा कि उसका शौभाग्य है कि उन्हे अपने पिता जी के साथ एक बार सर छोटू राम के कार्यक्रम मे जाकर उन्हे सुनने का मौका मिला था। चट्ठा ने कहा कि आज जिस जमीन के हम मालिक बने बैठे हैं, यह सब सर छोटूराम की देन है।  उन्होने किसानों के हित में अनेक कानून बनाए। वे सभी धर्मों व जातियों के लोगों को एक साथ लेकर चलते थे। 
कार्यक्रम के अंत में धर्मशाला के प्रधान राजकुमार ने अतिथियों का धन्यवाद किया। उन्होने बताया कि धर्मशाला के सदस्यों के कोल्जियम को लेकर 15 फरवरी तक का समय दिया गया है जिसे भी आप्ति हो वो जाट धर्मशाला से संपर्क कर सकते हैं। इस अवसर पर पूर्व कृषि मंत्री सरदार हरमोहिंदर सिंह चट्ठा, पूर्व सांसद कैलाशों सैनी, जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष मेवा सिंह, मनदीप सिंह चठ्ठा, जाट धर्मशाला के प्रधान राजकुमार, दलबीर डांडा, मास्टर गुरनाम सिंह, रामस्वरूप करोड़ा, बलबीर मास्टर, डाक्टर हवा सिंह, डाक्टर धर्मपाल, रमेश डांडा, पवन सोंटी, भले सिंह मैनेजर, शमशेर मलिक, जिले सिंह हथीरा, छज्जू राम धनोरी, सुरेश नैन, रणधीर हथीरा, महिंदर किरमच, अजमेर सिंह, धर्म सिंह सारसा, सुरेन्द्र ढिल्लो, दीवान किरमच, शमशेर ढुल, मदन मलिक, पूर्ण सिंह किरमच, लेखराज लाठर, मेहर सिंह आदि सहित भारी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे।

वक्त की तकदीर स्याही से लिखी नहीं जाती: 23 जनवरी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिवस पर विशेष


लेखक: प्रदीप कुमार आर्य
 भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़ कर भाग लेने वाले वीर सेनानियों की जब जब याद आती है तभी उन सभी क्रान्तिकारियों व शहीदों की याद में मस्तक झुक जाता है, जो अपनी चढ़ती जवानी को अपनी मातृभूमि पर न्यौछावर कर गये। 
उन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों में से एक है सुभाष चन्द्र जिनका नाम बड़े ही सम्मान के साथ नेताजी कहकर लिया जाता है। सुभाष चन्द्र बोस ही एक ऐसे क्रातिंकारी  हैं जो अपने बाहुबल  से अन्य देशों में जाकर आजाद हिन्द सेना की कमान संभाल कर भारत माता की गुलामी की जंजीर काटने में सफल हुए।
नेताजी त्यागी, परम उत्साही महान वीर एवं कट्टर देशभक्त हैं हर मुश्किलों का सामना करने की क्षमता नेताजी में थी। आज भी उस महापुरुष का नाम लेते ही भारत वासियों का सिर श्रद्धा से नतमस्तक हो जाता है।
वीर शिरोमणि सुभाष चन्द्र का जन्म 23 जनवरी 1897 ई में बंगाल के ‘कोड़ोनिया’ नामक गांव में हुआ था। इनके पिता जी श्री जानकी नाथ जी बसु सरकारी वकील थे और सरकार ने उन्हें सम्मान में राय बहादुर की उपाधि दे रखी थी।
नेताजी बचपन से ही उन्नत तेजस्वी एवं कुषाग्र बुद्धि रहे। आप के स्वाभिमानी व्यक्तित्व की झलक विद्यार्थी जीवन में ही प्रकट हो गई थी। जब आप कलकत्ता के प्रेसीडैंसी कालेज में पढ़ते थे। उन दिनों एक ‘ओटन’ नामक अंग्रेज प्रोफैसर ने भारतीयों के लिये कई अपमानजनक बातें कह दी थी। लेकिन यह अपमान वीर सुभाष से सहन नहीं हो सका और खड़े होकर प्रोफैसर को होष में आने को कहा। लेकिन सत्ता में मदहोष प्रोफैसर ने उल्टा कुत्ता बास्टर्ड़ की गाली दी, जो कि भारतीयों का अपमान एवं उपहास थी तथा अंग्रेजों के षासन होने के घमण्ड़ का सूचक थी। यह सुनकर वीर सुभाष चन्द्र का खून खौल उठा और प्रोफैसर का गला पकड़ कर कहा ‘हम कुत्ते हैं इसलिये कि तुम्हारे गुलाम हैं। लुटेरे, गोरे बन्दर यह गाली किस मुहॅ से दी?’ और एक झन्नाटेदार थप्पड़ प्रोफैसर के मुहॅ पर दे मारा। बस यह थप्पड़ क्या था मानों अंग्रेजी सरकार को खुली चुनौती थी। 1857 की आजादी की लड़ाई के बाद अंग्रेजों के मुहॅ पर भारत का पहला तमाचा था।
पहली बार सुभाष चन्द्र बोस पर तब संकट का बादल मण्ड़राया जब अंग्रेजों ने उन्हें ‘खतरनाक हिन्दुस्तानी’ घोषित कर कलकत्ता की जेल में ड़ाल दिया और कुछ समय पष्चात अंग्रेज सरकार ने यह भी घोषित कर दिया कि सुभाष चन्द्र की मृत्यु हो गई। पर सुभाष चन्द्र बोस अंग्रेजों की जेल से वेष बदल कर निकल चुके थे। अंग्रेज सिपाही  भी सुभाष  की खोज में चारों तरफ निकल पड़े, सिपाही ड़ालश्ड़ाल तो सुभाष पातश्पात। कहीं पठान के वेष में, कहीं हिन्दुस्तानी के वेष में, तो कभी विदेषी अंग्रेजी बनकर सुभाष बाबू अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकते हुए बच निकले। अंग्रेज तो तब हैरान रह गये जब वीर सुभाष ने 1939 में अपने जीवित होने की घोषणा की और सिंगापुर में जाकर एक विषाल जनसमुह को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत को आजाद कराने के लिये दो करोड़ ड़ालर की आवष्यकता है। यह अपील सुनते ही कुछ ही क्षणों में मंच पर धन व गहनों का ढ़ेर लग गया। इस से आम जनता की भावना का संकेत मिल चुका था और सुभाष ने नारा दिया ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’ यह आहवान सुनकर अनेकों नौजवानों ने स्वतंत्रता की बलिवेदी पर सर्वस्व न्यौछावर करने का संकल्प लिया। इस तरह सुभाष बाबू ने नौजवानों के दिलों में आजादी के लिये क्रान्ति पैदाकर आजाद हिन्द फौज की कमान संभालते हुए संग्राम का बिगुल बजा दिया।
प्रथम आक्रमण करतेश्हुए अनेक स्थानों पर कब्जा करते हुए सेना आगे बढ़ रही थी लेकिन बीच में ही वर्षा षुरु हो गई जिससे यह लड़ाई बीच में ही रुक गई। जिसके बाद पुनः आजादी की कामना करते हुए अपनी आजाद हिन्द के सेनानियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि साथियो मैं, सुख में-दुख में, दिन में-रात में, हार में-जीत में हर परिस्थितियों में आपके साथ रहॅूंगा, हमारा लक्ष्य दिल्ली है। हमारा आन्दोलन तभी षान्त होगा जब हम लालकिले की चोटी पर तिरंगा फहरायेगें।
इसके बाद आजादी की तमन्ना लिये वीर सुभाष चन्द्र बोस आगे बढ़े, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ साथियों के गद्दारी करने से इस बार भी लक्ष्य तक नहीं पहुँच सके। बारश्बार की असफलता प्राप्त होने पर भी नेताजी ने हिम्मत नहीं हारी, और किसी नई योजना के अनुसार आजादी की खोज में चले गये तथा अदृष्य हो गये।
इस सम्बन्ध में कोई कहता है कि 18 अगस्त 1945 को नेताजी विमान दुर्घटना में मर गये, कुछ लोगों का कहना है कि वो छिपे हुये हैं। वस्तुतः स्थिति क्या है, इस सम्बन्ध में दृढता़पूर्वक कोई नहीं कह सकता, लेकिन नीचे दिये गये तथ्यों के आधार पर यह अवष्य कहा जा सकता है कि 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नेता जी की मृत्यु नहीं हुई।
1 आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च अधिकारी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस सन् 1999 तक राष्ट्र सघ्ां के यु़द्ध अपराधी क्यों घोषित किये गये? यदि 1945 में मर चुके थे तो उसके बाद 1999 तक  युद्ध अपराधी मानना अपने आप में षक पैदा करता है।
2 सन् 1947 के आजादी के समझोते के गुप्त दस्तावेज तथा फाईल नं. 10 पेज नं. 279 को अध्ययन करने से पता चलता है कि 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नेता जी की मृत्यु नहीं हुई।
3 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की कथित मृत्यु की घोषणा के उपरान्त नेहरु जी ने सन् 1956 में षाहनवाज कमेटी तथा इन्दिरा गांधी ने 1970 में खोसला आयोग द्वारा जांच करवाई तथा दोनों रिर्पोटों में नेताजी को मृत घोषित किया गया, लेकिन 1978 में मोरारजी देसाई ने इन रिर्पोटों को रद्द कर दिया। तथा राजग सरकार ने भी मुखर्जी आयोग की स्थापना कर पुनः इस प्रष्न का उत्तर तलाषने का प्रयास किया था। लेकिन मुखर्जी आयोग द्वारा जांच रिपोर्ट को वर्तमान कांग्रेस सरकार ने मानने से ही इंकार कर दिया। इस जांच रिपोर्ट में जापान सरकार द्वारा जापान में 18 अगस्त 1945 को कोई दुर्घटना होने की बात को सिरे से खारिज करना इस सन्देह को सच्चाई में बदलता है कि नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को नहीं हुई।
4 सन् 1948 में विजय लक्ष्मी राजदूत ने रुस से वापिस आकर मुम्बई षान्ताक्रुज़ हवाई अड्ड़े से उतरते ही पत्रकारों के सामने कहा कि मैं भारत की जनता को ऐसा षुभ समाचार देना चाहती हॅॅूं  जो भारत की स्वतन्त्रता से बढ़कर खुषी का समाचार होगा परन्तु नेहरु जी ने इस समाचार को जनता तथा पत्रकारों को देने से इन्कार कर दिया क्योंकि वह समाचार नेताजी से रुस में मुलाकात होने का संदेष था।
5 भारतीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 4 अगस्त 1997 को दिये गये निर्णय के अनुसार ‘नेताजी के नाम के साथ मरणोपरान्त षब्द रद्द किया जाता है।’ क्या यह सिद्ध  नहीं होता कि नेताजी की मृत्यु नहीं हुई ।
6 सेना मुख्याल्य द्वारा आयोजित 1971 की लड़ाई का विजय दिवस का सीधा प्रसारण 16 दिसम्बर 1997 को दिल्ली दूरदर्षन पर सांय 5-47 बजे से लेकर 7-00 बजे तक किया गया जिसमें बताया गया कि 8 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी सेना की कमान एक बाबा संभाले हुये थे। दो दो सेनाओं की कमान सम्भालने वाला आखिर यह बाबा कौन था। सरकार इस बाबा का रहस्योदघाटन करे।
7 28 मई 1964 को प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरु की मृत्यु पर बनी सरकारी डाक्यूमैन्टरी फिल्म के लास्ट चैप्टर की फिल्म नं. 816 बी जिसमें साधु के वेष में नेता जी दिखाई दे रहे हैं।

8 नेताजी की तथाकथित मृत्यु 18.08.1945 के बाद मंचुरिया रेड़ियो स्टेषन से 19.12.1945, 19.01.1946, 19.02.1946 को नेता जी द्वारा राष्ट्र के नाम दिये गये सन्देष क्या यह साबित नहीं करते हैं कि नेताजी की मृत्यु का समाचार गलत है।
उपरोक्त तथ्यों को देखते हुये तो हम यह ही कह सकते हैं कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जो कि रहस्यमयी तरीके से रहे, रहस्यमयी तरीके से अंग्रेजों की जेल से निकले, रहस्यमयी तरीके से लड़ाई लड़ी, और रहस्यमयी तरीके से ही अदृष्य होकर आज भी रहस्य बने हुये हैं।
लेकिन आज बड़ा अफसोस होता है प्रायः जब दूरदर्षन पर कोई कार्यक्रम होता है तो देखने को मिलता है जिन्होंने आजादी का उपयोग किया है उनको ज्यादा महत्व दिया जाता है, जिन्होंने आजादी की बलिवेदी पर अपना सर्वस्व न्यौछावर किया उनकी उपेक्षा की जाती है। यह उन षहीदों का निरादर तथा उपहास है। कवि ने ठीक ही लिखा है :-
बदतमीजी कर रहे हैं, आज भंवरे चमन में,
साथियो आंधी उठाने का जमाना आगया है।
वक्त की तकदीर स्याही से लिखी जाती नहीं,
खून में कलम ड़ुबोने का जमाना आ गया है।
आज यदि सुभाष चन्द्र बोस भले ही प्रत्यक्ष रुप से हमारे बीच नहीं हों लेकिन उनका अधुरा स्वपन हमारे बीच में है। अदृष्य होने से पूर्व का वह आहवान कि अखण्ड भारत बनाने के लिए लडा जाने वाला तृतीय विष्वयुद्ध जब चरम पर होगा तब मैं प्रकट होउंगा हमें बार बार उनके प्रकटीकरण की इन्तजार करा रहा है। हम अंग्रेजों से तो मुक्त हो गये हैं लेकिन अंग्रेजियत की जंजीरों में आज भी जकड़े हुये हैं। उनके संपूर्ण आजादी के सपने को पूर्ण करने में प्रत्येक भारतवासी को तीसरा स्वाधीनता आन्दोलन में योगदान करना चाहिए।   


कल नेता जी का जन्मदिन है हरियाणा सरकार ने आदेश जारी करते हुए सभी जिला स्तर पर नेताजी की जयंती मनाने का निर्णय लिया है। उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देने का आदेश भी सभी अधिकारियों को दिया है, जबकि आज तक भारत सरकार नेता जी की मृत्यु की न तो घोषणा कर पाई है और इतने आयोग बैठने के बाद भी आज तक कोई ठोस सबूत सरकार के पास नहीं है। एक जीवित व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना या उनकी जयंती मनाना कहां तक सही है? सरकार को निर्णय लेते समय इन बातों पर गौर करना चाहिए

: लेखक प्रदीप आर्य जन चेतना मंच कुरुक्षेत्र, नेताजी कालोनी, कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष हैं।

Friday, January 19, 2018

वित्त मंत्री ने की सब्सिडी पर जैविक बीज उपलब्ध करवाने की मांग

चंडीगढ़, 19 जनवरी- हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने केंद्र सरकार से हरियाणा को खेती के लिए सब्सिडी पर जैविक बीज उपलब्ध करवाने की मांग कि ताकि जैविक खेती को और प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने केंद्र सरकार के जल प्रबंधन कार्यक्रेम के तहत हरियाणा को विशेष पैकेज देने की भी मांग की ताकि राज्य सरकार अपने हर खेत को पानी के वायदे को पूरा कर सके। 
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने केन्द्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्री बजट सलाहकार बैठक में कई अन्य मांगें भी रखीं, जिनमें से ज्यादातर मांगें जनहित और किसानों से जुडी थी। 
कैप्टन अभिमन्यु ने बैठक में कहा कि सामाजिक सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार अभी तक सिर्फ 300 रुपये प्रति व्यक्ति ही देती है जबकि राज्य सरकार 1800 रुपये पेंशन के तौर पर बुजुर्ग, विधवा एवं दिव्यांग जनों को अदा करती है। केंद्र सरकार ने 2012 के बाद इस मद में कोई बढ़ोतरी नहीं की। उन्होंने केंद्र सरकार से इसमें अपना हिस्सा बढ़ाने का आग्रह किया। वित्त मंत्री ने कर्मचारियों के लिए राशि की मांग करते हुए कहा कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों को समान वेतन समान कार्य के सिद्धांत पर वेतन तय करने के लिए केंद्र सरकार राज्य का सहयोग करे और राष्टï्रीय स्वास्थ्य मिशन और सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकार राज्य सरकार को अधिक राशि दे।
उन्होंने मांग की कि आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स के मानदेय में भी बढ़ौतरी की जानी चाहिए। इस सम्बंध में सुझाव दिया गया कि इस कौशल विकास योजना के तहत या तो 1500 रुपये की सीमा को हटाया जाए और अदा किये गए स्टाइफण्ड की 25 प्रतिशत की दर से प्रतिपूर्ति की जाए या भारत सरकार द्वारा 1500 रुपये प्रति मास की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर कम से कम 2000 रुपये प्रतिमास प्रति अप्रेंटिस समस्त प्रशिक्षण अवधि के लिए किया जाए। यदि ये प्रावधान किये जाते हैं तो निजी प्रतिष्ठान अप्रेंटिस अधिनियम, 1961 के तहत अप्रेंटिस लगाने के लिए उल्लेखनीय रूप से प्रोत्साहित होंगे।